8 मार्च 1949 को जशपुर राजपरिवार में जन्मे स्व.दिलीप सिंह जूदेव जी बचपन से ही जनसेवा और राष्ट्रभक्ति की भावना से प्रेरित थे। शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और 1978 में जशपुर नगर पालिका अध्यक्ष के रूप में अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की।1989 में 9वीं लोकसभा के सदस्य चुने गए, और बाद में 1992 में राज्यसभा में प्रवेश किया, 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी मंत्रिमंडल में पर्यावरण एवं वन राज्य मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला।

“घर वापसी” अभियान से राष्ट्रीय पहचान
दिलीप सिंह जूदेव जी का नाम राष्ट्रीय स्तर पर तब गूंजा, जब उन्होंने आदिवासी समाज में व्यापक “घर वापसी” आंदोलन चलाया। इस अभियान के तहत उन्होंने हजारों आदिवासी परिवारों को उनकी मूल सनातन सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने का कार्य किया। यह केवल धार्मिक पुनरुत्थान नहीं था, बल्कि सांस्कृतिक गौरव और आत्मसम्मान का अभियान था।

जल-जंगल-जमीन के प्रहरी
जूदेव जी ने हमेशा आदिवासी समाज के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की रक्षा की। उन्होंने वनाधिकार, पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी परंपराओं के संवर्धन को अपने जीवन का उद्देश्य बनाया। उनकी नेतृत्व शैली निडर, स्पष्ट और जनहित पर केंद्रित थी।

अंतिम दिनों में भी जनता के करीब
अपने राजनीतिक जीवन के अंतिम चरण तक वे लगातार जनता से जुड़े रहे। 14 अगस्त 2013 को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में लीवर और किडनी संबंधी जटिलताओं के कारण उनका निधन हुआ। उस समय वे केवल 64 वर्ष के थे, लेकिन उन्होंने एक अमिट विरासत छोड़ दी।

एक प्रेरणा, जो अमर रहेगी
स्व दिलीप सिंह जूदेव जी का जीवन इस बात का प्रमाण है कि सच्चा नेतृत्व केवल सत्ता पाना नहीं, बल्कि जनता के हृदय में अमिट स्थान बनाना है। उनकी निडरता, सेवा भावना और राष्ट्र के प्रति समर्पण हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।
