रायपुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से दशकों पुराने नक्सलवाद के दंश को मिटाने के लिए राज्य और केंद्र सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक रणनीति तैयार की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हाल ही में नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद यह स्पष्ट कर दिया है कि बस्तर में अब नक्सलियों के लिए दो ही रास्ते बचे हैं—या तो वे हथियार छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हों, या फिर सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई का सामना करें।
क्या है सरकार का ‘त्रिशूल’ प्लान?
सरकार ने इस बार केवल बंदूकों के दम पर नहीं, बल्कि तीन तरफा वार करने की योजना बनाई है:
- सुरक्षा (Security): अबूझमाड़ के उन इलाकों में नए ‘सिक्योरिटी कैंप’ स्थापित किए जा रहे हैं, जिन्हें कभी नक्सलियों का ‘अभेद्य किला’ माना जाता था। इन कैंपों के माध्यम से सुरक्षा बल अब नक्सलियों के कोर जोन में घुसकर ऑपरेशन चला रहे हैं।
- विकास (Development): ‘नियद नेल्लानार’ (आपका अच्छा गांव) योजना के तहत उन गांवों में स्कूल, अस्पताल और बिजली पहुंचाई जा रही है, जो पिछले 30 सालों से अंधेरे में थे। सरकार का मानना है कि सड़क पहुंचने से नक्सली विचारधारा कमजोर होगी।
- विश्वास (Trust): स्थानीय युवाओं को पुलिस और बस्तर फाइटर्स में भर्ती कर उन्हें रोजगार से जोड़ा जा रहा है, ताकि वे भटककर नक्सलवाद की ओर न जाएं।
अबूझमाड़ अब नहीं रहा ‘अबूझ’
रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा बलों ने पहली बार अबूझमाड़ के अंदरूनी गांवों में तिरंगा फहराया है। ड्रोन तकनीक और सैटेलाइट इमेजरी की मदद से नक्सलियों के ट्रेनिंग कैंपों को ध्वस्त किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा है कि “विकास की राह में रोड़ा अटकाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।”
