भारत की पहली डिजिटल जनगणना: 1 अप्रैल 2026 से होगा आगाज़, जानें घर बैठे कैसे दर्ज करा सकेंगे अपनी जानकारी

नई दिल्ली | 8 जनवरी, 2026 भारत सरकार ने देश की पहली ‘डिजिटल जनगणना’ (Digital Census 2026-27) के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। गृह मंत्रालय (MHA) के अनुसार, दशकों से चली आ रही पेन-पेपर वाली प्रक्रिया को अब पूरी तरह से अलविदा कह दिया गया है। 1 अप्रैल, 2026 से शुरू होने वाली यह जनगणना न केवल आधुनिक होगी, बल्कि इसमें पहली बार आम नागरिकों को अपनी जानकारी स्वयं भरने (Self-Enumeration) का अधिकार भी मिलेगा।

दो चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया

​सरकार ने जनगणना की व्यापकता को देखते हुए इसे दो मुख्य चरणों में विभाजित किया है:

  1. प्रथम चरण (1 अप्रैल – 30 सितंबर 2026): इस दौरान ‘हाउस-लिस्टिंग’ और ‘हाउसिंग सेंसस’ का कार्य होगा। इसमें मकानों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाएं (जैसे शौचालय, बिजली, पेयजल) और संपत्ति का विवरण जुटाया जाएगा।
  2. द्वितीय चरण (9 फरवरी – 28 फरवरी 2027): यह मुख्य जनसंख्या गणना का चरण होगा। इसमें शिक्षा, धर्म, व्यवसाय, वैवाहिक स्थिति और पहली बार व्यापक स्तर पर जातिगत डेटा (Caste Data) एकत्र किया जाएगा।

सेल्फ-एन्युमरेशन (Self-Enumeration): सबसे बड़ा बदलाव

​इस बार की जनगणना की सबसे बड़ी विशेषता ‘डिजिटल पोर्टल’ और ‘मोबाइल ऐप’ है।

  • ​अब आपको सरकारी प्रगणक (Enumerator) के घर आने का इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं है।
  • ​नागरिक आधिकारिक जनगणना पोर्टल पर जाकर अपने मोबाइल नंबर के जरिए लॉग-इन कर सकेंगे।
  • ​जानकारी भरने के बाद एक रेफरेंस नंबर (Reference Number) मिलेगा, जिसे बाद में आने वाले अधिकारी को दिखाकर प्रक्रिया को वेरिफाई कराया जा सकेगा।

पूछे जाएंगे इंटरनेट और अनाज से जुड़े सवाल

​बदलते दौर के साथ जनगणना के सवालों में भी बदलाव किया गया है। इस बार प्रगणक आपसे पूछेंगे:

  • ​क्या आपके पास स्मार्टफोन और इंटरनेट कनेक्शन है?
  • ​आपके घर में मुख्य रूप से कौन सा अनाज (गेहूं, चावल, बाजरा आदि) खाया जाता है?
  • ​क्या घर में एलपीजी कनेक्शन या इलेक्ट्रिक कुकिंग की सुविधा है?

जाति जनगणना पर विशेष ध्यान

​राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में लंबे समय से चल रही मांग के बाद, सरकार ने इस डिजिटल जनगणना में जातिगत डेटा को भी शामिल किया है। इससे भविष्य में सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और आरक्षण नीतियों के विश्लेषण में मदद मिलेगी।

सुरक्षा और गोपनीयता

​डेटा चोरी की चिंताओं पर सरकार ने स्पष्ट किया है कि एकत्रित किया गया डेटा पूरी तरह से एन्क्रिप्टेड (Encrypted) होगा। इसे क्लाउड सर्वर पर स्टोर किया जाएगा और किसी भी निजी संस्था के साथ साझा नहीं किया जाएगा।

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