24 मई को रामलीला मैदान में गूँजेगी ‘डीलिस्टिंग गर्जना महारैली’, देशभर से जुटेंगे लाखों आदिवासी

नई दिल्ली: धर्मांतरित व्यक्तियों को अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची से बाहर करने (डीलिस्टिंग) की मांग को लेकर देशभर के आदिवासियों ने अब दिल्ली कूच की तैयारी शुरू कर दी है। आगामी 24 मई को देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में ‘डीलिस्टिंग गर्जना महारैली’ का आयोजन किया जाएगा, जिसमें कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी और गुजरात से लेकर पूर्वोत्तर भारत तक के लाखों वनवासी और जनजातीय समाज के लोग हुंकार भरेंगे।

क्यों हो रही है यह महारैली?

​इस विशाल आंदोलन का नेतृत्व ‘जनजाति सुरक्षा मंच’ (JSM) कर रहा है। आंदोलन का मुख्य मुद्दा यह है कि जो जनजातीय व्यक्ति अपनी मूल संस्कृति, परंपरा और रूढ़ि प्रथा को छोड़कर किसी अन्य धर्म (विशेषकर ईसाई या इस्लाम) में परिवर्तित हो चुके हैं, उन्हें अनुसूचित जनजाति (ST) के तहत मिलने वाले आरक्षण और अन्य संवैधानिक लाभों से वंचित किया जाए।

​मंच का तर्क है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 341 के तहत जिस तरह अनुसूचित जाति (SC) के धर्मांतरित लोगों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलता, उसी तर्ज पर अनुच्छेद 342 में संशोधन कर अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए भी यही प्रावधान लागू होना चाहिए।

दौरा लाभ बंद करने की मांग

​आदिवासी समाज का कहना है कि धर्मांतरित लोग एक तरफ अल्पसंख्यक होने का लाभ उठाते हैं और दूसरी तरफ ST कोटे का भी लाभ ले रहे हैं। यह ‘दोहरा लाभ’ (Dual Benefit) उन मूल आदिवासियों के अधिकारों का हनन है जो आज भी अपनी संस्कृति और देव-परंपराओं को संजोए हुए हैं। 24 मई की रैली इसी विसंगति को दूर करने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास होगी।

गांव-गांव में शुरू हुई तैयारी

​इस महारैली को सफल बनाने के लिए छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे आदिवासी बहुल राज्यों में व्यापक स्तर पर जनसंपर्क अभियान शुरू हो चुका है। गांव-गांव में बैठकों का दौर जारी है और लोगों को डीलिस्टिंग के महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है।

​आयोजकों का दावा है कि यह रैली स्वतंत्र भारत के इतिहास में जनजातीय समाज का अब तक का सबसे बड़ा शक्ति प्रदर्शन होगी, जो सरकार को यह संदेश देगी कि अब “डीलिस्टिंग नहीं, तो वोट नहीं” की भावना समाज में प्रबल हो चुकी है।

प्रमुख मांगें:

​मूल जनजातीय संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण सुनिश्चित हो।

​धर्मांतरित व्यक्तियों को ST सूची से तत्काल बाहर किया जाए (Delisting)।

​अनुच्छेद 342 में आवश्यक संशोधन किया जाए।

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