भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ़्तार से दुनिया हैरान! IMF ने बढ़ाया GDP अनुमान; 7.3% की दर से दौड़गा भारत

नई दिल्ली/वाशिंगटन। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) को लेकर अपना भरोसा और मजबूत किया है। मंगलवार को जारी अपनी ताजा ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक’ (World Economic Outlook – January 2026 Update) रिपोर्ट में IMF ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.3% कर दिया है।

​यह अनुमान अक्टूबर 2025 में जारी किए गए पिछले अनुमान (6.6%) से 0.7% अधिक है। IMF का यह कदम बताता है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था (Fastest Growing Major Economy) बना रहेगा।

​क्यों बढ़ाया गया अनुमान?

​IMF ने अपनी रिपोर्ट में भारत की इस रफ़्तार के पीछे तीन प्रमुख कारण बताए हैं:

  1. मजबूत घरेलू मांग (Domestic Demand): भारत में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में खपत बढ़ी है।
  2. निवेश में तेजी: सरकारी पूंजीगत व्यय (Capex) और निजी क्षेत्र के निवेश में निरंतर वृद्धि हो रही है।
  3. उम्मीद से बेहतर नतीजे: वित्त वर्ष की तीसरी और चौथी तिमाही में भारतीय कॉर्पोरेट सेक्टर और मैन्युफैक्चरिंग के नतीजे उम्मीद से कहीं बेहतर रहे हैं।

​चीन और अमेरिका से काफी आगे

​IMF के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 में वैश्विक विकास दर (Global Growth) 3.3% रहने का अनुमान है, जबकि भारत की दर इसके दोगुने से भी ज्यादा रहेगी।

  • भारत: 7.3%
  • चीन: 4.5% (अनुमानित)
  • अमेरिका: 2.4% (अनुमानित)

​IMF के मुख्य अर्थशास्त्री ने कहा, “भारत एक ‘ब्राइट स्पॉट’ बना हुआ है। जहां दुनिया के कई देश मंदी और महंगाई से जूझ रहे हैं, वहीं भारत ने अपनी नीतियों और डिजिटलीकरण के दम पर स्थिरता बनाए रखी है।”

​RBI और सरकार के अनुमान के करीब

​IMF का यह नया अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और केंद्र सरकार के आंकड़ों के बेहद करीब है। गौरतलब है कि RBI ने भी अपनी पिछली मौद्रिक नीति समीक्षा में वित्त वर्ष 2026 के लिए 7.3% की वृद्धि दर का भरोसा जताया था।

​आगे की राह (Future Outlook)

​हालांकि, IMF ने यह भी संकेत दिया है कि वित्त वर्ष 2026-27 और 2027-28 में विकास दर थोड़ी सामान्य होकर 6.4% के आसपास रह सकती है। इसका कारण वैश्विक बाजार में मंदी और चक्रीय कारकों (Cyclical Factors) का असर कम होना बताया गया है। लेकिन इसके बावजूद, भारत अगले कुछ वर्षों तक वैश्विक विकास का इंजन बना रहेगा।

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