रायपुर, 29 जनवरी 2026
छत्तीसगढ़ सरकार की किसान हितैषी नीतियों और तकनीक आधारित धान खरीदी व्यवस्था का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। प्रदेश भर में पारदर्शी डिजिटल प्रणाली और ₹3100 प्रति क्विंटल के सर्वाधिक समर्थन मूल्य से किसानों के चेहरे खिले हुए हैं। इस नई व्यवस्था ने न केवल बिचौलियों को खत्म किया है, बल्कि किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी बनाया है।
ऑनलाइन टोकन से मिली ‘समय की आजादी’
सरगुजा जिले के ग्राम कतकालो के प्रगतिशील किसान श्री सुरेश राम रजवाड़े इस बदलाव के प्रत्यक्ष गवाह हैं। सुरेश राम ने बताया कि पहले धान बेचने के लिए लंबी लाइनों और अनिश्चितता का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब डिजिटल टोकन प्रणाली ने सब कुछ बदल दिया है। उन्होंने घर बैठे अपनी सुविधा के अनुसार तिथि का चयन किया और बिना किसी प्रतीक्षा के सुव्यवस्थित ढंग से अपना धान विक्रय किया।
90 क्विंटल धान और ₹3100 का दाम
सुरेश राम ने इस वर्ष लगभग 90 क्विंटल धान बेचा है। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार द्वारा दिए जा रहे 3100 रुपये प्रति क्विंटल के दाम ने हमारी आर्थिक स्थिति को नई मजबूती दी है।” इस वर्ष उन्हें प्राप्त हुई राशि से उन्होंने न केवल खेती की जरूरतें पूरी कीं, बल्कि अपने खेत में सिंचाई के लिए नए कूप (कुएं) का निर्माण भी कराया है।
बहुफसलीय खेती की ओर बढ़ते कदम
सिंचाई की नई व्यवस्था होने से अब सुरेश राम केवल धान तक सीमित नहीं रहेंगे। वे अब साल में एक से अधिक फसलें उगाने की योजना बना रहे हैं, जिससे उनकी आय में और वृद्धि होगी। उन्होंने धान उपार्जन केंद्रों पर तौल, पंजीयन और भुगतान की त्वरित प्रक्रिया पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि समय पर सीधे बैंक खाते में पैसा आने से किसानों का भरोसा सरकार पर और मजबूत हुआ है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति
राज्य शासन की इस डिजिटल और समयबद्ध व्यवस्था ने छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान फूंक दी है। सुरेश राम रजवाड़े और उन जैसे लाखों किसान आज गर्व से कह रहे हैं कि सरकार की नीतियों से छत्तीसगढ़ का किसान अब सही मायने में स्वावलंबी और सशक्त बन रहा है।
