नई दिल्ली, 29 जनवरी 2026
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद के दोनों सदनों में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 (Economic Survey) पेश किया। यह दस्तावेज देश की अर्थव्यवस्था का वह ‘रिपोर्ट कार्ड’ है, जो बताता है कि पिछले एक साल में देश ने क्या खोया और क्या पाया। सर्वे के अनुसार, वैश्विक अस्थिरता और व्यापारिक तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह मजबूत और स्थिर बनी हुई है।
सर्वेक्षण की 5 बड़ी बातें (Key Highlights):
1. जीडीपी (GDP) की रफ्तार: दुनिया में नंबर 1
सर्वे में अनुमान लगाया गया है कि अगले वित्त वर्ष (FY27) में भारत की विकास दर 6.8% से 7.2% के बीच रहेगी। हालांकि यह चालू वर्ष के 7.4% से थोड़ी कम है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों (IMF और वर्ल्ड बैंक) के अनुमानों से काफी बेहतर है। भारत अभी भी दुनिया की सबसे तेज़ गति से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
2. महंगाई पर ऐतिहासिक नियंत्रण
आम आदमी के लिए सबसे सुखद खबर महंगाई के मोर्चे पर है। अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान औसत खुदरा महंगाई (CPI) महज 1.7% रही है। यह पिछले कई वर्षों का सबसे निचला स्तर है। सर्वे के मुताबिक, बेहतर सप्लाई चैन और खाद्य कीमतों में सुधार ने महंगाई को काबू में रखा है।
3. बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर रिकॉर्ड खर्च
सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर को विकास का मुख्य इंजन बनाया है। सरकारी पूंजीगत व्यय (Capex) वित्त वर्ष 2018 के ₹2.63 लाख करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में ₹11.21 लाख करोड़ (बजट अनुमान) तक पहुँच गया है। यह जीडीपी का लगभग 4% है, जो भविष्य के भारत की नींव रख रहा है।
4. विदेशी मुद्रा भंडार और निर्यात
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 16 जनवरी 2026 तक $701.4 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है, जो 11 महीने के आयात के लिए पर्याप्त है। वहीं, वित्त वर्ष 2025 में भारत का कुल निर्यात $825.3 बिलियन के सर्वकालिक उच्च स्तर पर रहा।
5. निजी क्षेत्र और AI की चुनौती
सर्वेक्षण में निजी क्षेत्र से अपील की गई है कि वे निवेश बढ़ाएं और रोजगार के नए अवसर पैदा करें। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से श्रम बाजार में होने वाले बदलावों और चुनौतियों पर भी एक विशेष अध्याय शामिल किया गया है, जिसमें चेतावनी दी गई है कि तकनीक के साथ-साथ कौशल विकास (Skill Development) पर जोर देना अनिवार्य है।
चुनौतियां भी बरकरार
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitics) और अमेरिकी टैरिफ में वृद्धि जैसे बाहरी जोखिम अभी भी बने हुए हैं। लेकिन भारत की घरेलू मांग और मजबूत बैंकिंग सिस्टम इसे किसी भी झटके से बचाने में सक्षम है।
