बस्तर से वैश्विक मंच तक छत्तीसगढ़ पर्यटन की नई उड़ान; अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ किर्सी ह्यवैरिनेन ने परखा बस्तर का सामर्थ्य

बस्तर, 25 फरवरी 2026/ छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में पर्यटन विकास की एक नई और सकारात्मक इबारत लिखी जा रही है। कभी अपनी भौगोलिक चुनौतियों के लिए पहचाने जाने वाले बस्तर की छवि अब प्रकृति, संस्कृति और सामुदायिक समृद्धि के वैश्विक मॉडल के रूप में उभर रही है। इसी कड़ी में, अंतरराष्ट्रीय पर्यटन विशेषज्ञ और ‘हिवा कोचिंग एंड कंसल्टिंग’ की संस्थापक सुश्री किर्सी ह्यवैरिनेन का छह दिवसीय प्रवास राज्य के पर्यटन क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।

धुरवा संस्कृति और स्थानीय व्यंजनों से अभिभूत हुई किर्सी

अपने दौरे के दौरान सुश्री किर्सी बस्तर के ग्राम धुड़मारास पहुँचीं, जहाँ धुरवा डेरा होमस्टे में उनका पारंपरिक स्वागत किया गया। ग्रामीणों ने सिहाड़ी और महुए की माला पहनाकर तथा पारंपरिक धुरवा नृत्य के साथ अंतरराष्ट्रीय अतिथि का सत्कार किया। स्थानीय खान-पान का अनुभव लेते हुए उन्होंने कलम भाजी, बोदई की सब्जी, कोसरा भात और मंडिया पेज जैसे जैविक व्यंजनों का स्वाद लिया। सुश्री किर्सी ने कहा कि बस्तर की सामाजिक एकजुटता और आत्मीयता दुनिया के पर्यटकों के लिए एक विशिष्ट आकर्षण है।

यूएन ‘बेस्ट टूरिज्म विलेज’ का लक्ष्य

यह प्रवास केवल भ्रमण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य धुड़मारास को यूनिटेड नेशंस (UN) के ‘बेस्ट टूरिज्म विलेज अपग्रेड प्रोग्राम’ के मानकों के अनुरूप तैयार करना है। सुश्री किर्सी स्थानीय स्वयं सहायता समूहों, युवाओं और होमस्टे संचालकों को सेवा गुणवत्ता, स्वच्छता प्रबंधन, डिजिटल ब्रांडिंग और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर प्रशिक्षण दे रही हैं।

चित्रकोट और मेंदरी घूमर का वैश्विक प्रचार

प्रवास के दौरान उन्होंने विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात और मेंदरी घूमर क्षेत्र का भी अवलोकन किया। जिला प्रशासन और छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के समन्वय से आयोजित इस दौरे का उद्देश्य चित्रकोट जैसे राष्ट्रीय स्थलों को वैश्विक प्रचार अभियानों से जोड़ना है।

बदलता बस्तर: सतत विकास की ओर कदम

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ के इस दौरे से बस्तर को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर जगह मिलने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के स्थायी अवसर सृजित होंगे। सामुदायिक पर्यटन को संस्थागत आधार मिलने से क्षेत्र की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। यह मॉडल न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि देश के अन्य आदिवासी क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बनेगा।

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