नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (TRTI) द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘आदि परब-2026’ का “From Tradition to Identity” थीम के साथ शानदार समापन हुआ। इस आयोजन में जशपुर जिले के प्रीमियम ब्रांड ‘JASHPURE’ (जय जंगल द्वारा संचालित) के स्टॉल ने अपनी उच्च गुणवत्ता और नवाचार से विशेषज्ञों और आगंतुकों का दिल जीत लिया।
परंपरा से आधुनिकता का संगम: महुआ अब बना ‘सुपरफूड’
इस स्टॉल का मुख्य आकर्षण महुआ आधारित उत्पाद रहे। जशपुर की इस पहल ने महुआ को केवल पारंपरिक मद्य (शराब) की छवि से बाहर निकालकर उसे एक ‘प्राकृतिक सुपरफूड’ के रूप में स्थापित किया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की दूरदर्शी सोच के अनुरूप, महुआ को अब पोषण, स्वास्थ्य और जनजातीय आजीविका के एक बड़े स्रोत के रूप में देखा जा रहा है। आगंतुकों ने महुआ के औषधीय गुणों और इसकी प्रीमियम पैकेजिंग की जमकर सराहना की।
जशपुर की महिलाओं ने बिखेरी चमक
कार्यक्रम में जशपुर का प्रतिनिधित्व अनिश्वरी भगत और प्रभा साय ने किया। उन्होंने स्टॉल पर आए शोधकर्ताओं और अधिकारियों को महुआ, मिलेट्स और पारंपरिक रूप से संसाधित चावल की विशेषताओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इन उत्पादों के प्रसंस्करण में जनजातीय महिलाओं की मुख्य भूमिका है, जो न केवल पुरानी खाद्य प्रणालियों को पुनर्जीवित कर रही हैं, बल्कि अपनी आजीविका को भी सशक्त बना रही हैं।
आदि परब: जनजातीय विरासत को मिला मंच
भारत सरकार के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम ने वन आधारित उत्पादों और हस्तशिल्प को आधुनिक बाजार से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। ‘JASHPURE’ की सफलता ने यह साबित कर दिया कि छत्तीसगढ़ के वनों में छिपे पारंपरिक खाद्य संसाधन आज के आधुनिक उपभोक्ताओं की पहली पसंद बन सकते हैं।
