बिलासपुर सिम्स में विश्व स्वास्थ्य दिवस पर गूंजा ‘जेंडर फॉर हेल्थ’ का नारा; 100 से अधिक छात्रों ने सृजनात्मकता से दिया समानता का संदेश

स्वास्थ्य सिर्फ बीमारियों की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि एक समावेशी सोच का नाम है। इसी विचार को धरातल पर उतारते हुए विश्व स्वास्थ्य दिवस के मौके पर बिलासपुर स्थित सिम्स (CIMS) चिकित्सालय में “जेंडर फॉर हेल्थ” विषय पर एक भव्य और उद्देश्यपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

​राष्ट्रीय स्तर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की थीम को अपनाते हुए आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य केंद्र बिंदु स्वास्थ्य के क्षेत्र में जेंडर समानता और सामाजिक जागरूकता रहा।

रचनात्मकता के जरिए दिया स्वास्थ्य का संदेश

​कार्यक्रम में सिम्स के लगभग 100 से अधिक छात्र-छात्राओं ने अपनी कला और ज्ञान का प्रदर्शन किया। आयोजन के दौरान तीन प्रमुख प्रतियोगिताएं आकर्षण का केंद्र रहीं:

  1. क्विज प्रतियोगिता: छात्रों ने स्वास्थ्य और चिकित्सा क्षेत्र के अपने ज्ञान को परखा।
  2. पोस्टर मेकिंग: कैनवास पर रंगों के जरिए यह दिखाया गया कि कैसे लैंगिक भेदभाव स्वास्थ्य सेवाओं की राह में बाधा बनता है।
  3. स्लोगन राइटिंग: कम शब्दों में ‘समान अधिकार-समान स्वास्थ्य’ जैसे प्रभावी संदेशों ने उपस्थित जनसमूह को प्रेरित किया।

विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और सामुदायिक चिकित्सा विभाग की भूमिका

​यह पूरा आयोजन कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। विशेषज्ञों ने चर्चा के दौरान बताया कि देशभर के सैकड़ों मेडिकल कॉलेजों में इसी तरह की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, ताकि भविष्य के डॉक्टर न केवल इलाज करना सीखें, बल्कि समाज की सामाजिक विसंगतियों को भी समझ सकें।

इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति

​कार्यक्रम की सफलता में संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों और चिकित्सकों का विशेष योगदान रहा। इस अवसर पर मुख्य रूप से उपस्थित थे:

  • डॉ. रमणेश मूर्ति (अधिष्ठाता, सिम्स)
  • डॉ. लखन सिंह (चिकित्सा अधीक्षक)
  • डॉ. भूपेंद्र कश्यप (नोडल अधिकारी)

​साथ ही डॉ. हेमलता ठाकुर, डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. अर्चना सिंह, डॉ. प्रवीण श्रीवास्तव, डॉ. सचिन पांडे और डॉ. विवेक शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ चिकित्सक और स्टाफ ने भी छात्रों का उत्साहवर्धन किया।

प्रतिभाओं का सम्मान

​कार्यक्रम के समापन पर विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। विशेषज्ञों ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि एक डॉक्टर के रूप में उनकी जिम्मेदारी अस्पताल की दीवारों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें समाज में स्वास्थ्य के प्रति सजगता फैलाने वाला ‘चेंज मेकर’ बनना होगा।

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