बस्तर 2.0: गोलियों की गूँज थमी, अब विकास की बारी; सीएम साय ने पीएम मोदी को सौंपा बदलाव का ‘ब्लूप्रिंट’

कभी अबूझमाड़ के जंगलों से सिर्फ संघर्ष की खबरें आती थीं, लेकिन आज वहां से उम्मीदों की नई कोपलें फूट रही हैं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर बस्तर के भविष्य को बदलने वाला एक ऐतिहासिक दस्तावेज पेश किया। इसे ‘बस्तर 2.0’ का नाम दिया गया है, जो केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि बस्तर के हर आदिवासी परिवार के जीवन में खुशहाली लाने का एक संकल्प है।

​मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को मानसून के बाद बस्तर आने का न्योता दिया, ताकि दुनिया देख सके कि कैसे गोलियों की गूँज के बीच अब शांति का संगीत बज रहा है।

5 स्तंभों पर टिका है ‘बस्तर 2.0’ का सपना

​मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर का नया स्वरूप ‘सैचुरेशन, कनेक्ट, फैसिलिटेट, एम्पावर और एंगेज’ की रणनीति पर चलेगा। इसका मतलब है—सुविधाएं हर घर तक पहुँचेंगी, सड़कें हर गाँव को जोड़ेंगी और युवा सशक्त बनेंगे।

  • सड़कों का जाल: 2027 तक हर अधूरा रास्ता पूरा होगा। 228 नई सड़कें और 267 पुल बस्तर की दूरियों को खत्म करेंगे।
  • शिक्षा और स्वास्थ्य का उजाला: 45 पोटा केबिन अब पक्के स्कूल बनेंगे। दंतेवाड़ा में मेडिकल कॉलेज और जगरगुंडा-ओरछा में ‘एजुकेशन सिटी’ बच्चों का भविष्य संवारेंगी।
  • खेतों तक पहुँचेगा पानी: इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार प्रोजेक्ट्स से करीब 32 हजार हेक्टेयर खेतों की प्यास बुझेगी।

लक्ष्य: 15 हजार से 30 हजार तक का सफर

​मुख्यमंत्री का विजन बहुत स्पष्ट है—बस्तर के लोगों की जेब में पैसा पहुँचना चाहिए। सरकार का लक्ष्य है कि 2029 तक 85% परिवारों की मासिक आय 15,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये की जाए। इसके लिए ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ (आपका अच्छा गाँव) योजना का विस्तार अब गरियाबंद और मोहला-मानपुर जैसे नए जिलों तक भी किया जा रहा है।

​”एक दशक पहले जो शांति का सपना प्रधानमंत्री जी ने देखा था, वह अब जमीन पर उतर रहा है। बस्तर में अब डर नहीं, विकास की चमक है।” — विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री

ग्लोबल टूरिज्म का केंद्र बनेगा बस्तर

​सिर्फ लोहा और वनोपज ही नहीं, अब बस्तर अपनी खूबसूरती से दुनिया को लुभाएगा।

  • चित्रकोट और तीरथगढ़ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निखारा जा रहा है।
  • ​एडवेंचर लवर्स के लिए कैनोपी वॉक और ग्लास ब्रिज जैसे रोमांचक प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू हो चुका है।
  • बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों से स्थानीय प्रतिभा को मंच मिल रहा है।

‘बस्तर मुन्ने’ यानी अग्रणी बस्तर

​इस नई कार्ययोजना में ‘बस्तर मुन्ने’ कार्यक्रम सबसे खास है। अब जनता को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, बल्कि अफसर खुद पंचायतों में शिविर लगाएंगे। जाति प्रमाणपत्र से लेकर राशन कार्ड तक, सब कुछ मौके पर ही बनेगा।

पीएम मोदी के दौरे पर रहेगी सबकी नजर

​प्रधानमंत्री के संभावित दौरे के दौरान रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन और जगदलपुर एयरपोर्ट के विस्तार जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स की सौगात मिल सकती है। ये वो प्रोजेक्ट्स हैं जो बस्तर को सीधे देश की मुख्यधारा से जोड़ देंगे।

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