हौसले बुलंद हों तो शारीरिक व्याधियां भी रास्ता नहीं रोक पातीं। इसका जीवंत उदाहरण पेश किया है अरुणाचल प्रदेश की वेटलिफ्टर अनाई वांगसु ने। रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स (KITG) के पहले संस्करण के लिए रवाना होने से चंद दिन पहले अनाई अस्पताल में भर्ती थीं और उन्हें ड्रिप चढ़ाई जा रही थी, लेकिन आज उनके गले में स्वर्ण पदक चमक रहा है।
बीमारी से सालों पुराना संघर्ष
वांगचो जनजाति से ताल्लुक रखने वाली अनाई साल 2019 से गंभीर गैस्ट्रिक समस्या से जूझ रही हैं। यह बीमारी उन्हें अचानक कमजोर और डिहाइड्रेटेड कर देती है। वेटलिफ्टिंग जैसे ताकत वाले खेल में यह एक बड़ी बाधा है। रायपुर आने से ठीक पहले भी वह अस्पताल में थीं, लेकिन डिस्चार्ज होने के अगले ही दिन उन्होंने जिम में पसीना बहाना शुरू कर दिया।
‘करीब आकर चूक जाने’ का सिलसिला खत्म
अनाई के करियर में अब तक कई रजत और कांस्य पदक आए थे। साल 2025 के खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स (राजस्थान) में भी वे स्वर्ण से चूक गई थीं। अनाई ने भावुक होकर बताया, “पिछली प्रतियोगिताओं में जब मैं एक लिफ्ट या एक मिनट की देरी से सोना चूक जाती थी, तो बहुत रोती थी। परिवार हमेशा पूछता था कि गोल्ड कब आएगा? आज वह सपना पूरा हो गया।”
भाई का सपना और मैरी कॉम की प्रेरणा
अनाई की इस यात्रा के पीछे उनके बड़े भाई सिंचाड बांसु का हाथ है, जो खुद एक राष्ट्रीय स्तर के वेटलिफ्टर रहे हैं। शुरुआत में अनाई फिल्म ‘मैरी कॉम’ देखकर बॉक्सर बनना चाहती थीं, लेकिन उनके भाई ने उनकी प्रतिभा को पहचान कर उन्हें वेटलिफ्टिंग की ओर मोड़ा। आज वे लखनऊ के NCOE में उन्नत प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।
भविष्य का लक्ष्य: तिरंगे का मान बढ़ाना
कोविड-19 के दौरान संसाधनों की कमी और खराब पोषण ने अनाई की सेहत पर बुरा असर डाला था, जिससे वे अक्सर निराश हो जाती थीं। लेकिन रायपुर की इस जीत ने उन्हें नया आत्मविश्वास दिया है। अनाई का अंतिम लक्ष्य भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलना और पदक जीतना है।
