बस्तर में ज्ञान की नई अलख: कलेक्टर ने ‘पुस्तक दान रथ’ को दिखाई हरी झंडी, 7 दिनों तक चलेगा महाभियान

बस्तर जिले में शिक्षा और ज्ञान का प्रकाश फैलाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा एक सराहनीय पहल ‘पुस्तक दान अभियान’ की शुरुआत की गई है। कलेक्टर श्री आकाश छिकारा के मार्गदर्शन में शुरू हुए इस अभियान का मुख्य लक्ष्य घरों की अलमारियों में बेकार पड़ी उपयोगी किताबों को उन जरूरतमंद हाथों तक पहुँचाना है, जो संसाधनों के अभाव में पढ़ाई से दूर रह जाते हैं।

कलेक्टर ने रथ को किया रवाना

गुरुवार को कलेक्ट्रेट परिसर में कलेक्टर आकाश छिकारा ने विशेष रूप से तैयार किए गए ‘पुस्तक दान रथ’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने आम जनता, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से अपील की कि वे महापुरुषों की जीवनियाँ, सामान्य ज्ञान और अन्य प्रेरणादायक पुस्तकें दान कर इस पुनीत कार्य में सहभागी बनें।

पहले ही दिन दिखा भारी उत्साह

अभियान के पहले दिन शहर के पावर हाउस चौक, डोंगरीपारा, कोहकापाल, धरमपुरा और नया बस स्टैंड जैसे इलाकों में लोगों ने बढ़-चढ़कर अपनी पुस्तकें दान कीं। इस दौरान जिला शिक्षा अधिकारी श्री बीआर बघेल और आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त श्री गणेश राम सोरी सहित कई अधिकारियों ने खुद भी पुस्तकें दान कर मुहिम की शुरुआत की।

7 दिनों का पूरा शेड्यूल: आपके क्षेत्र में कब आएगा रथ?

​प्रशासन द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार यह रथ अगले सात दिनों तक जिले के कोने-कोने में पहुंचेगा:

  • 20 मार्च: तोकापाल के एर्राकोट और करंजी क्षेत्र।
  • 21 मार्च: बास्तानार और किलेपाल।
  • 22 मार्च: दरभा और तीरथगढ़ अंचल।
  • 23 मार्च: बकावण्ड क्षेत्र।
  • 24 मार्च: लोहण्डीगुड़ा।
  • 25 मार्च (अंतिम दिन): बस्तर विकासखंड के भानपुरी और केशरपाल।

पुस्तकालयों में संरक्षित होंगी किताबें

एकत्रित की गई इन सभी पुस्तकों को जिला ग्रंथालय और विकासखंड स्तर के पुस्तकालयों में व्यवस्थित रूप से रखा जाएगा। इसके सफल संचालन के लिए सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। प्रशासन को उम्मीद है कि यह अभियान न केवल किताबों को नया जीवन देगा, बल्कि समाज में दान की एक नई बौद्धिक संस्कृति को भी जन्म देगा।

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