बिहान योजना ने बदली पंचबाई की तकदीर: साहूकारों के कर्ज से मुक्त होकर अब कमा रही हैं महीने के 3 लाख रुपए

छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार की ‘बिहान’ योजना (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) ग्रामीण अंचलों में महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रही है। मुंगेली जिले के लोरमी विकासखंड अंतर्गत ग्राम खपरीडीह की रहने वाली श्रीमती पंचबाई साहू ने इस योजना के माध्यम से न केवल गरीबी को मात दी है, बल्कि आज वे एक सफल व्यवसायी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं।

आर्थिक तंगी से आत्मनिर्भरता तक का सफर

पंचबाई बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने से पहले उनके परिवार की माली हालत बेहद खराब थी। छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए उन्हें साहूकारों के पास जाना पड़ता था, जहां ऊंची ब्याज दरों के कारण वे कर्ज के जाल में फंसती जा रही थीं। इससे न केवल परिवार का गुजर-बसर मुश्किल था, बल्कि आत्मसम्मान को भी ठेस पहुंचती थी।

ऐसे मिली कामयाबी की उड़ान

पंचबाई की जिंदगी में बदलाव तब आया जब वे ‘माँ सरस्वती महिला स्व-सहायता समूह’ से जुड़ीं। बिहान योजना के तहत उन्हें वित्तीय साक्षरता मिली और व्यवसाय शुरू करने के लिए आर्थिक मदद प्राप्त हुई:

  • रिवॉल्विंग फंड: 15 हजार रुपए
  • बैंक ऋण: 1 लाख 50 हजार रुपए
  • CIF राशि: 60 हजार रुपए
  • समूह स्तर का सहयोग: 30 हजार रुपए

​इन पैसों का सही इस्तेमाल करते हुए उन्होंने एक फर्नीचर दुकान खोली। उनकी मेहनत और बेहतर योजना का नतीजा है कि आज उनका व्यवसाय फल-फूल रहा है।

सालाना टर्नओवर लाखों में

एक समय पाई-पाई को मोहताज रहने वाली पंचबाई की मासिक आय आज 2.5 लाख से 3 लाख रुपए के बीच है। इस सफलता ने उनके जीवन स्तर को पूरी तरह बदल दिया है। अब वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला पा रही हैं और गांव की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

​श्रीमती पंचबाई साहू की यह कहानी साबित करती है कि यदि सही अवसर और सरकारी योजनाओं का सहारा मिले, तो गांव की महिलाएं भी बड़े व्यापारिक कीर्तिमान स्थापित कर सकती हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *