दंतेवाड़ा: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को आज एक ऐतिहासिक सफलता मिली, जब दंतेवाड़ा जिले में 63 नक्सलियों ने पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के सामने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। यह आत्मसमर्पण, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, जो राज्य में शांति और विकास लाने के अपने संकल्प को दोहराती है।
‘पुना नर्कोम’ अभियान की बड़ी कामयाबी
दंतेवाड़ा पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ‘पुना नर्कोम’ (नई सुबह) अभियान के तहत यह अब तक का सबसे बड़ा आत्मसमर्पण है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में 36 इनामी नक्सली भी शामिल हैं, जिन पर छत्तीसगढ़ सरकार और केंद्रीय एजेंसियों द्वारा कुल 1.2 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। इसमें 18 महिला कैडर भी शामिल हैं, जो लंबे समय से विभिन्न नक्सली गतिविधियों में संलिप्त थीं।
पुलिस अधीक्षक (दंतेवाड़ा) गौरव राय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह अभियान स्थानीय पुलिस, CRPF और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है, जिसमें भटके हुए युवाओं को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने सरकार की पुनर्वास नीति पर विश्वास जताया है। उन्हें समाज में फिर से स्थापित करने के लिए हर संभव मदद दी जाएगी।”
शांति और विकास की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़
इस बड़े आत्मसमर्पण को प्रदेश में बढ़ती शांति और विकास की लहर का संकेत माना जा रहा है। जानकारों का मानना है कि भाजपा सरकार द्वारा चलाए जा रहे विकास कार्य, बेहतर कानून-व्यवस्था और पुनर्वास नीतियों के कारण नक्सली कैडर अब हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन जीना चाहते हैं। यह घटना नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की बढ़ती पैठ और स्थानीय लोगों के बीच विश्वास बहाली का भी प्रमाण है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस सफलता पर सुरक्षा बलों को बधाई दी और दोहराया कि उनकी सरकार शांति और विकास के माध्यम से छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जो भी हथियार छोड़कर मुख्यधारा में आएगा, सरकार उनका स्वागत करेगी और उन्हें एक सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्रदान करेगी।
पुनर्वास और मुख्यधारा में वापसी
आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को राज्य की पुनर्वास नीति के तहत सहायता प्रदान की जाएगी, जिसमें आर्थिक मदद, कौशल विकास प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर शामिल हैं, ताकि वे समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त कर सकें। इस कदम से क्षेत्र में और अधिक नक्सलियों को आत्मसमर्पण करने के लिए प्रेरित होने की उम्मीद है, जिससे बस्तर अंचल में शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा।
