रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजनीति में भूचाल लाने वाले कथित ‘सेक्स सीडी’ कांड (Sex CD Case) में शनिवार को एक नया और अहम मोड़ आया है। रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने मामले में डिस्चार्ज (आरोप मुक्त) करने संबंधी आदेश को खारिज (set aside) कर दिया है।
क्या है कोर्ट का फैसला?
ताजा जानकारी के अनुसार, सीबीआई कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि भूपेश बघेल के खिलाफ इस मामले में ट्रायल (मुकदमा) चलेगा। इससे पहले निचली अदालत या पूर्व की प्रक्रियाओं में राहत की जो उम्मीदें थीं, उन्हें इस आदेश ने खत्म कर दिया है। कोर्ट ने माना है कि मामले में आगे की कार्यवाही के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं।
राजेश मूणत की प्रतिक्रिया
इस मामले में शिकायतकर्ता और पूर्व पीडब्ल्यूडी मंत्री राजेश मूणत (बीजेपी नेता) ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। यह मामला मूल रूप से तब शुरू हुआ था जब मूणत की कथित अश्लील सीडी सामने आई थी, जिसे उन्होंने फर्जी बताया था और कांग्रेस नेताओं पर उनकी छवि खराब करने के लिए इसे बांटने का आरोप लगाया था।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद वर्ष 2017 का है। उस समय छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार थी और राजेश मूणत मंत्री थे। एक कथित सेक्स सीडी वायरल हुई थी, जिसे लेकर बीजेपी ने तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल पर सीडी बांटने और साजिश रचने का आरोप लगाया था।
- मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी गई थी।
- सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में भूपेश बघेल समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया था।
- भूपेश बघेल को इस मामले में जेल भी जाना पड़ा था, हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी।
राजनीतिक मायने
साल 2026 की शुरुआत में आए इस फैसले ने राज्य के सियासी पारे को फिर से गरमा दिया है। जहां बीजेपी इसे “सत्य की जीत” बता रही है, वहीं कांग्रेस के लिए यह एक कानूनी और राजनीतिक चुनौती बन गई है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कोर्ट में ट्रायल के दौरान क्या नए तथ्य सामने आते हैं।
