रायपुर, 17 फरवरी 2026: छत्तीसगढ़ अब अपनी पहचान बदल रहा है। कभी नक्सल प्रभावित राज्य की छवि से पहचाने जाने वाला यह प्रदेश आज देश के सबसे तेजी से उभरते पर्यटन हब के रूप में स्थापित हो चुका है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार द्वारा सुरक्षा, कनेक्टिविटी और पर्यटन अधोसंरचना को प्राथमिकता देने का परिणाम है कि आज यहाँ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों का तांता लगा हुआ है।
पर्यटन को मिला ‘उद्योग’ का दर्जा
राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति 2024-30 ने प्रदेश में पर्यटन की दिशा बदल दी है। पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने से निवेशकों को सब्सिडी और टैक्स में भारी छूट मिल रही है, जिससे इको-एथनिक और एडवेंचर टूरिज्म में करोड़ों रुपये का निवेश हो रहा है।
छत्तीसगढ़ के प्रमुख आकर्षण: जो दुनिया को भा रहे हैं
प्रदेश की विविधताओं ने सैलानियों का मन मोह लिया है:
- चित्रकोट जलप्रपात: बस्तर का यह जलप्रपात ‘एशिया का नियाग्रा’ कहलाता है।
- मधेश्वर पर्वत (जशपुर): यहाँ स्थित विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग अब वैश्विक श्रद्धा का केंद्र है।
- कुटुमसर गुफाएं: अपनी रहस्यमयी बनावट के कारण एडवेंचर प्रेमियों की पहली पसंद बनी हैं।
- धुड़मारास गांव: यूएनडब्ल्यूटीओ (UNWTO) द्वारा सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम के रूप में चयनित इस गांव ने आदिवासी संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई है।
सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय रोजगार
बस्तर की गोंड, मुरिया और हल्बा जनजातियों की जीवनशैली, उनके लोकनृत्य (पंथी, राउत नाचा, सुवा) और हस्तशिल्प पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण हैं। सरकार की ‘होम-स्टे’ और गाइड सेवाओं जैसी योजनाओं ने स्थानीय युवाओं और ग्रामीण समुदायों के लिए रोजगार के नए द्वार खोल दिए हैं।
सुरक्षा और सुविधाओं का विस्तार
पर्यटन स्थलों तक पहुँचने के लिए सड़कों का जाल बिछाया गया है और सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद किया गया है। आज छत्तीसगढ़ नक्सलवाद की छवि को पीछे छोड़कर एक सुरक्षित और सुंदर ‘इको-कल्चरल’ पर्यटन राज्य के रूप में दुनिया के नक्शे पर चमक रहा है।
