छत्तीसगढ़ के ‘हाथी प्रवेश द्वार’ कहे जाने वाले जशपुर जिले में वन विभाग ने हाथियों की निगरानी और सुरक्षा के लिए एक बड़ी तकनीकी छलांग लगाई है। अब जिले के जंगलों में हाथियों की आवाजाही और उनके लोकेशन को ट्रैक करने के लिए ड्रोन तकनीक (Drone Technology) का इस्तेमाल शुरू कर दिया गया है।
क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
जशपुर और आसपास के क्षेत्रों में मानव-हाथी संघर्ष (Human-Elephant Conflict) एक बड़ी चुनौती रही है। घने जंगलों और दुर्गम रास्तों के कारण हाथियों के दल की सटीक लोकेशन जानना मुश्किल होता था, जिससे कई बार ग्रामीण और हाथी आमने-सामने आ जाते थे। ड्रोन की मदद से अब वन विभाग काफी ऊंचाई से हाथियों के दल की सही संख्या और उनकी दिशा का पता लगा सकेगा।
वन अमले को मिला विशेष प्रशिक्षण
इस नई तकनीक के प्रभावी संचालन के लिए जशपुर वन मंडल के अंतर्गत आने वाले रेंजों के वन रक्षकों और मैदानी कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण (Special Training) दिया गया है। इस ट्रेनिंग में कर्मचारियों को ड्रोन उड़ाने, रिमोट सेंसिंग के जरिए इमेज कैप्चर करने और हाथियों को बिना परेशान किए उनकी निगरानी करने के गुर सिखाए गए हैं।
रियल-टाइम अलर्ट से मिलेगी सुरक्षा
ड्रोन से प्राप्त डेटा और वीडियो फुटेज के आधार पर अब वन विभाग ग्रामीणों को ‘रियल-टाइम’ अलर्ट जारी कर सकेगा। इससे न केवल जनहानि को रोका जा सकेगा, बल्कि फसल नुकसान में भी कमी आने की उम्मीद है। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि ड्रोन तकनीक के आने से हाथियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और तेजी आएगी।
