छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के गृह जिले जशपुर में ग्रामीण महिलाएं अब केवल गृहिणी नहीं, बल्कि कुशल उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत कांसाबेल विकासखंड के ग्राम सेम्हर कछार की महिलाओं ने स्वरोजगार की एक नई मिसाल पेश की है। यहाँ की ‘हरियाली स्वसहायता समूह’ की 11 महिलाओं ने लुप्त होती पारंपरिक हस्तशिल्प कला को अपनी आजीविका का मजबूत आधार बना लिया है।
छिंद कासा से तैयार हो रहे आकर्षक उत्पाद
समूह की महिलाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध ‘छिंद कासा’ का उपयोग कर बेहद आकर्षक टोकरी और अन्य पारंपरिक उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों की फिनिशिंग और सुंदरता के कारण स्थानीय हाट-बाजारों और मेलों में इनकी भारी मांग देखी जा रही है।
बालमुनि भगत की जुबानी: संघर्ष से सफलता तक
समूह की सदस्य श्रीमती बालमुनि भगत ने बताया कि पहले वे केवल खेती और घरेलू कामकाज तक सीमित थीं। ‘बिहान योजना’ से जुड़ने के बाद उन्हें न केवल उचित प्रशिक्षण मिला, बल्कि उत्पादों की बिक्री के लिए बेहतर प्लेटफॉर्म भी प्राप्त हुआ। आज समूह की सभी 11 महिलाएं अच्छी आमदनी कर रही हैं, जिससे उनके परिवार का आर्थिक स्तर सुधरा है।
सशक्त और आत्मविश्वास से लबरेज ‘दीदियां’
समूह की महिलाओं का कहना है कि आर्थिक स्वतंत्रता ने उनके भीतर एक नया आत्मविश्वास जगाया है। अब वे अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं हैं। महिलाओं ने इस सकारात्मक बदलाव के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की योजनाओं ने उन्हें समाज में एक नई पहचान दिलाई है।
