जशपुर: साइबेरिया से हजारों मील उड़कर नीमगांव पहुंचे विदेशी मेहमान; 130 प्रजातियों के पक्षियों से गुलजार हुआ बांध, पर्यटकों का लगा तांता

जशपुर जिले का नीमगांव बांध इन दिनों प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। सात समुंदर पार कर और हजारों किलोमीटर की लंबी उड़ान भरकर विदेशी प्रवासी पक्षी (Migratory Birds) अपनी शीतकालीन छुट्टियां मनाने यहाँ पहुंच चुके हैं। इन विदेशी मेहमानों के आगमन से नीमगांव जलाशय एक बार फिर जीवंत हो उठा है और पूरा इलाका पक्षियों की मधुर चहचहाहट से गूंज रहा है।

​हर साल की तरह इस बार भी भोजन, सुरक्षा और प्रजनन की तलाश में ये पक्षी साइबेरिया की जमा देने वाली ठंड से बचने के लिए भारत के इस हिस्से में आए हैं। जिला मुख्यालय से महज 8 किलोमीटर दूर स्थित यह बांध अब एक प्रमुख ‘बर्ड वाचिंग स्पॉट’ बन चुका है।

120 से 130 प्रजातियों का लगा जमघट

​वनमंडलाधिकारी (DFO) शशि कुमार ने बताया कि वन विभाग द्वारा कराए गए सर्वेक्षण में इस क्षेत्र में पक्षियों की लगभग 120 से 130 प्रजातियां देखी गई हैं। इनमें विदेशी प्रवासियों के साथ-साथ स्थानीय दुर्लभ प्रजातियां भी शामिल हैं।

DFO ने बताया कि यहाँ मुख्य रूप से सलहक, ब्राह्मणी बत्तख, बार-हेडेड गूज, फ्लेमिंगो, पिंटेल, यूलैंड हेडेड स्टार और लिटिल कोरीडोव जैसे आकर्षक पक्षी देखे जा रहे हैं।

जल्द बनेगा पक्षी विहार (Bird Sanctuary)

​प्रशासन यहाँ पक्षी संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। बांध के पास एक पक्षी विहार विकसित किया जा रहा है, जहाँ पर्यटक और पक्षी प्रेमी इन दुर्लभ प्रजातियों के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। नीमगांव के सरपंच नागेंद्र भगत ने बताया कि 15 नवंबर से शुरू हुआ पक्षियों का यह प्रवास फरवरी माह तक चलता है। इसे देखने के लिए न केवल स्थानीय बल्कि दूसरे जिलों और राज्यों से भी पर्यटक और विशेषज्ञ पहुंच रहे हैं।

गिधवा-परसदा में ‘पक्षी मित्रों’ ने ली ट्रेनिंग

​पक्षियों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए वन मंडल जशपुर ने एक अनोखी पहल की है। नीमगांव के स्थानीय युवाओं को ‘पक्षी मित्र’ बनाकर उन्हें गिधवा-परसदा (रायपुर) में विशेष प्रशिक्षण दिलवाया गया है।

इस दल में विशाल भगत, अजय भगत, परमेश्वर भगत, आतिश कुमार भगत, बिंदेश्वर राम भगत और शीतल भगत शामिल थे। वहां उन्होंने पक्षियों की पहचान, उनके आगमन काल और उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के गुर सीखे हैं, ताकि वे नीमगांव आने वाले पर्यटकों को भी जागरूक कर सकें।

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