जशपुरनगर/बगीचा:
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में स्वरोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में एक नई इबारत लिखी जा रही है। जिले के बगीचा विकासखण्ड के ग्राम चम्पा की महिलाएं अब मधुमक्खी पालन के जरिए आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना और नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑइल के तहत इन महिलाओं को इस लाभदायक व्यवसाय से जोड़ा गया है।
कृषि विभाग का मिला तकनीकी सहयोग
बगीचा के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री लालसाय केरकेट्टा के मार्गदर्शन में ‘खुशी स्व सहायता समूह’ की महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। विभाग द्वारा समूह को 5 मधुमक्खी बक्से निःशुल्क प्रदान किए गए हैं। वर्तमान में रबी सीजन के दौरान खेतों में लगी सरसों की फसल इन मधुमक्खियों के लिए वरदान साबित हो रही है, जिससे उच्च गुणवत्ता वाले शहद का उत्पादन हो रहा है।
बाजार में अच्छी मांग, हो रही तगड़ी कमाई
समूह की महिलाओं ने बताया कि मात्र एक महीने के भीतर 5 बक्सों से लगभग 10 किलोग्राम शहद का उत्पादन हुआ है। इस शुद्ध शहद को स्थानीय बाजार में 500 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है। महिलाओं का कहना है कि यह व्यवसाय कम मेहनत और कम लागत में बेहतरीन मुनाफा दे रहा है।
पर्यावरण और खेती के लिए भी फायदेमंद
विशेषज्ञों के अनुसार, मधुमक्खी पालन न केवल शहद देता है, बल्कि यह जैव विविधता को बढ़ावा देने और परागण (Pollination) के जरिए फसलों की पैदावार बढ़ाने में भी सहायक है। कृषि विभाग ने अन्य किसान भाइयों को भी खरीफ और रबी की तिलहन फसलों के साथ मधुमक्खी पालन अपनाने की सलाह दी है।
इस सफलता पर खुशी स्व सहायता समूह की सदस्यों ने छत्तीसगढ़ शासन और कृषि विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया है।
