नवा रायपुर: उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने आज नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान में देश के पहले डिजिटल जनजातीय संग्रहालय का अवलोकन किया। संग्रहालय की भव्यता और तकनीक से प्रभावित होकर उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का यह शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय अद्वितीय है और यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा।
जनजातीय नायकों की शौर्य गाथा देख हुए अभिभूत
जस्टिस सूर्यकांत ने संग्रहालय की विभिन्न दीर्घाओं (गैलरीज) का भ्रमण किया और छत्तीसगढ़ के जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आंदोलनों को करीब से समझा। उन्होंने कहा कि यह संग्रहालय केवल इतिहास का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि अन्याय और शोषण के खिलाफ एकजुट होने का संदेश देता है। उन्होंने विशेष रूप से 1910 के भूमकाल विद्रोह और जननायक गुंडाधुर के साहस की सराहना की।
डिजिटल तकनीक और परंपरा का संगम
अवलोकन के दौरान आदिम जाति विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणी बोरा ने न्यायाधीशों को बताया कि कैसे साल, साजा और महुआ के प्रतीकात्मक वृक्षों के माध्यम से विद्रोहों की कहानी बयां की गई है। जस्टिस सूर्यकांत ने संग्रहालय में स्थापित मां दंतेश्वरी के डिजिटल मंदिर में घंटी बजाकर दर्शन किए और भविष्य में साक्षात दंतेवाड़ा जाकर दर्शन करने की इच्छा भी प्रकट की।
शहीदों के शस्त्रों का किया अवलोकन
न्यायाधीशों ने शहीद वीर नारायण सिंह की तलवार और विद्रोह के दौरान उपयोग किए गए पारंपरिक अस्त्र-शस्त्रों को देखा। इस अवसर पर उनके साथ:
- जस्टिस श्री पी.एस. नरसिम्हा (सुप्रीम कोर्ट)
- जस्टिस श्री प्रशांत कुमार (सुप्रीम कोर्ट)
- चीफ जस्टिस श्री रमेश सिन्हा (छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट)
- चीफ जस्टिस श्री कल्पथी राजेंद्रन श्रीराम (राजस्थान हाईकोर्ट)
नवा रायपुर का गौरव: देश का पहला डिजिटल संग्रहालय
उल्लेखनीय है कि इस संग्रहालय का लोकार्पण प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 1 नवंबर 2025 को राज्योत्सव के अवसर पर किया था। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन और प्रमुख सचिव श्री सोनमणी बोरा के नेतृत्व में निर्मित यह संग्रहालय अब अपने दूसरे चरण के विस्तार की ओर अग्रसर है।
