लुडेग (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ के पारंपरिक लोक पर्व ‘छेर-छेरा’ के पावन अवसर पर लुडेग में छत्तीसगढ़ नागवंशी समाज द्वारा भव्य मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय सम्मिलित हुईं।

परंपरा और दान का संगम
समारोह को संबोधित करते हुए विधायक गोमती साय ने कहा कि छेर-छेरा का त्यौहार हमारी छत्तीसगढ़ी संस्कृति की उदारता और समरसता का प्रतीक है। “छेर-छेरा, कोठी के धान ल हेरहेरा” के नारों के साथ यह पर्व हमें यह संदेश देता है कि अपनी उपज और सुख को समाज के साथ साझा करना ही हमारी असली पहचान है। उन्होंने नागवंशी समाज की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से सामाजिक एकता सुदृढ़ होती है और आने वाली पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहती है।

गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मुख्य रूप से श्री मनीष अग्रवाल जी (जिला महामंत्री), श्री लखुराम जी, श्री पूरेन्द्र यादव जी (पूर्व मंडल अध्यक्ष),भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता गण, नागवंशी समाज के समस्त पदाधिकारी एवं सामाजिक बंधु

सांस्कृतिक छटा और मिलन
कार्यक्रम के दौरान समाज के लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ एक-दूसरे को पर्व की बधाई दी। नागवंशी समाज द्वारा विधायक गोमती साय और अन्य अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया गया। इस दौरान स्थानीय कलाकारों और सामाजिक बंधुओं ने छत्तीसगढ़ी संस्कृति की झलक प्रस्तुत की। उपस्थित कार्यकर्ताओं ने भी समाज के उत्थान और विकास को लेकर चर्चा की।

छेर-छेरा पर्व के बारे में:
छेर-छेरा छत्तीसगढ़ का प्रमुख लोक पर्व है जो पौष मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह पर्व नई फसल के घर आने की खुशी में मनाया जाता है। इस दिन ‘दान’ देने और लेने की अनूठी परंपरा है, जो समाज में ऊंच-नीच के भेदभाव को समाप्त कर आपसी प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देती है।
