छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी ‘महतारी वंदन योजना’ न केवल महिलाओं को आर्थिक संबल दे रही है, बल्कि उन्हें उद्यमी और आत्मनिर्भर भी बना रही है। बीजापुर जिले के दूरस्थ गंगालूर क्षेत्र के ग्राम कावड़गांव की श्रीमती सुखी पुनेम इस बदलाव की एक जीवंत तस्वीर बनकर उभरी हैं।
47 वर्षीय सुखी पुनेम ने योजना से मिलने वाली राशि को केवल खर्च नहीं किया, बल्कि उसे भविष्य के लिए निवेश बनाया। अपने पति सोमलू पुनेम के सहयोग से उन्होंने घर के पास की खाली जमीन पर एक शानदार ‘किचन गार्डन’ (बाड़ी) विकसित की है।
सब्जियों की खेती से पोषण और आय
योजना की राशि से सुखी ने उन्नत किस्म के बीज खरीदे और बाड़ी तैयार की। आज उनकी मेहनत का परिणाम है कि वहां टमाटर, बैंगन और सरसों की भाजी जैसी ताजी सब्जियां लहलहा रही हैं।
- पोषण: परिवार को अब बाजार से सब्जियां खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे शुद्ध और पौष्टिक आहार मिल रहा है।
- अतिरिक्त आय: अपनी जरूरतों के बाद बची हुई सब्जियों को बेचकर वे परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती दे रही हैं।
समाज के प्रति जिम्मेदारी: बच्चों को मिल रहा पौष्टिक आहार
सुखी पुनेम की संवेदनशीलता यहीं खत्म नहीं होती। वे अपनी बाड़ी में उगाई गई ताजी सब्जियां गांव के स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र में भी उपलब्ध कराती हैं। उनका यह छोटा सा योगदान क्षेत्र में कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को और भी मजबूत बना रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका के मार्गदर्शन ने उनकी इस सफलता में अहम भूमिका निभाई है।
