छत्तीसगढ़ के उन सुदूर गांवों के लिए यह एक बड़ी राहत की खबर है, जो अब तक आवागमन के लिए निजी वाहनों या पैदल रास्तों पर निर्भर थे। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना 2025’ ने बस्तर और सरगुजा संभाग के अंदरूनी इलाकों की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से अब तक 57 मार्गों पर बसों का संचालन शुरू हो चुका है, जिससे 330 गांव पहली बार यात्री बस सुविधा से जुड़ गए हैं।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए तहसील व जिला मुख्यालयों तक आसानी से पहुँचाना है।
बस संचालकों को सरकार दे रही सब्सिडी
ग्रामीण मार्गों पर बसों का संचालन आर्थिक रूप से घाटे का सौदा न हो, इसके लिए साय सरकार ने बस आपरेटरों के लिए खजाना खोल दिया है। सरकार द्वारा वित्तीय सहायता का प्रावधान इस प्रकार किया गया है:
- प्रथम वर्ष: ₹26 प्रति किलोमीटर
- द्वितीय वर्ष: ₹24 प्रति किलोमीटर
- तृतीय वर्ष: ₹22 प्रति किलोमीटर
इसके अलावा, बस संचालकों को अधिकतम 3 वर्षों के लिए मासिक कर (Tax) में भी पूर्णतः छूट दी जा रही है।
जशपुर, बस्तर और सरगुजा पर विशेष फोकस
योजना के पहले चरण में आदिवासी बहुल बस्तर और सरगुजा संभाग को प्राथमिकता दी गई है। जिलावार स्थिति देखें तो जशपुर जिले में 7 मार्गों पर बसों का संचालन शुरू हो चुका है, जिससे जिले के कई दुर्गम इलाके मुख्यधारा से जुड़ गए हैं।
अन्य जिलों की स्थिति:
- सुकमा: 8 बसें
- दंतेवाड़ा: 7 बसें
- कांकेर: 6 बसें
- सूरजपुर: 6 बसें
- कोरिया: 5 बसें
- नारायणपुर, कोण्डागांव, बलरामपुर: 4-4 बसें
- जगदलपुर, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, अंबिकापुर: 2-2 बसें
पारदर्शी प्रक्रिया और भविष्य का रोडमैप
मार्गों का चयन जिला स्तरीय समिति की अनुशंसा पर किया जा रहा है और टेंडर प्रक्रिया के जरिए सबसे कम रेट देने वाले आवेदकों को परमिट जारी किए जा रहे हैं।
विभाग के अनुसार, 12 और नए मार्गों पर तैयारी पूरी हो चुकी है और 15 मार्गों के लिए निविदाएं जारी हैं। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 तक इस योजना के तहत 200 बसों के संचालन का लक्ष्य रखा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
