नई दिल्ली: भारतीय लोकतंत्र और शासन व्यवस्था में आज एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के नए और अत्याधुनिक परिसर ‘सेवा तीर्थ’ का भव्य उद्घाटन किया। आजादी के बाद यह पहली बार है जब देश का मुख्य कार्यकारी कार्यालय किसी नए और पूर्णतः स्वदेशी आधुनिक परिसर में स्थानांतरित हुआ है।
ब्रिटिश विरासत से आधुनिकता की ओर
पिछले 78 वर्षों से देश का शासन रायसीना हिल्स स्थित ब्रिटिश कालीन ‘साउथ ब्लॉक’ से चलाया जा रहा था। ‘सेवा तीर्थ’ के उद्घाटन के साथ ही अब प्रधानमंत्री और उनका पूरा स्टाफ इस नई बिल्डिंग से कार्य करेगा। उद्घाटन समारोह के दौरान पीएम मोदी ने कहा, “सेवा तीर्थ केवल एक इमारत नहीं, बल्कि विकसित भारत के संकल्पों का केंद्र है। यहाँ ‘नागरिक देवो भव:’ के मंत्र के साथ जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान होगा।”
क्या है ‘सेवा तीर्थ’ की खासियत?
- डिजिटल इंडिया का प्रतीक: यह परिसर पूरी तरह से पेपरलेस और हाई-टेक डिजिटल कनेक्टिविटी से लैस है।
- कर्तव्य भवन: मुख्य परिसर के साथ ‘कर्तव्य भवन-1’ और ‘कर्तव्य भवन-2’ का भी अनावरण किया गया है, जहाँ विभिन्न मंत्रालयों के समन्वय के लिए विशेष वॉर-रूम बनाए गए हैं।
- पर्यावरण अनुकूल: बिल्डिंग को ‘ग्रीन रेटिंग’ के आधार पर बनाया गया है, जिसमें सौर ऊर्जा और वर्षा जल संचयन की उन्नत व्यवस्था है।
- सुरक्षा चक्र: यह दुनिया के सबसे सुरक्षित कार्यालयों में से एक है, जिसे आधुनिक साइबर और फिजिकल सिक्योरिटी प्रोटोकॉल के तहत तैयार किया गया है।
जनता के लिए सुलभ शासन
प्रधानमंत्री ने बताया कि ‘सेवा तीर्थ’ में एक विशेष ‘पब्लिक विंग’ भी बनाई गई है, जहाँ से आम नागरिक अपनी शिकायतों और सुझावों की ट्रैकिंग सीधे कर सकेंगे। यह कदम शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने की दिशा में बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।
