पक्के घर का सपना हुआ साकार: कोरिया की जलकी रानी के परिवार को मिला प्रधानमंत्री आवास का साथ

बैकुंठपुर/कोरिया: शासन की जनहितकारी योजनाएं जब अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुंचती हैं, तो वे केवल एक सरकारी आंकड़ा नहीं, बल्कि किसी परिवार के जीवन बदलने की कहानी बन जाती हैं। ऐसी ही एक कहानी कोरिया जिले के ग्राम पंचायत भांडी की है, जहां मजदूरी कर जीवन यापन करने वाली श्रीमती जलकी रानी और उनके पति दुलार साय का पक्के घर का सपना अब हकीकत में बदल चुका है।

कच्चे मकान और टपकती छत का संघर्ष

​जलकी रानी अपने पति और बच्चों के साथ एक पुराने कच्चे मकान में रहने को मजबूर थीं। मिट्टी की दीवारें और खपरैल की छत उनके लिए मुसीबत का सबब थी। बारिश के दिनों में घर के भीतर पानी भरना और कड़ाके की ठंड में बच्चों की सुरक्षा की चिंता इस परिवार की रोजमर्रा की सच्चाई थी। मजदूरी से होने वाली सीमित आय के कारण पक्का मकान बनाना इनके लिए कल्पना से परे था।

मेहनत और योजना का संगम

​प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत जब इस परिवार को आवास की स्वीकृति मिली, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। खास बात यह रही कि जलकी रानी और दुलार साय ने न केवल सरकारी सहायता का लाभ लिया, बल्कि खुद भी निर्माण कार्य में हाथ बंटाया। उन्होंने मनरेगा के तहत मिलने वाली 90 दिनों की मजदूरी राशि को भी अपने घर के निर्माण में लगाया, जिससे उनके सपनों का घर मजबूती से खड़ा हो सका।

अब सुरक्षित है भविष्य

​आज जलकी रानी का परिवार एक मजबूत पक्की छत के नीचे सुरक्षित महसूस कर रहा है। जलकी रानी भावुक होकर कहती हैं कि यह घर उनकी मेहनत और सरकार की योजना का वह सुखद परिणाम है, जिसने उनके बच्चों को एक सुरक्षित भविष्य दिया है। अब न तो बारिश का डर है और न ही मौसम की मार।

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