छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर वन विभाग ने एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। दंतेवाड़ा और बीजापुर के जंगलों में बाघ और तेंदुए के शिकार मामले में विभाग ने एक डिप्टी रेंजर देवी प्रसाद ओयाम सहित कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई विभाग के लिए जितनी बड़ी सफलता है, उतनी ही चौंकाने वाली भी, क्योंकि इसमें विभाग का ही जिम्मेदार अधिकारी शामिल पाया गया।
डिप्टी रेंजर की मिलीभगत से होता था शिकार
जाँच में खुलासा हुआ कि डिप्टी रेंजर देवी प्रसाद ओयाम शिकारियों को जंगल में एंट्री दिलाने और सुरक्षित शिकार करने में मदद करता था। शिकारियों ने लोहे के तारों का फंदा बनाकर उसमें मांस फंसाया था, जिसमें फंसकर 3 वर्षीय बाघ और एक तेंदुए की मौत हो गई। आरोपी इन वन्यप्राणियों की खाल निकालकर रायपुर में ऊंचे दामों पर बेचने की योजना बना रहे थे।
वन मंत्री के निर्देश पर त्वरित एक्शन
मामले की गंभीरता को देखते हुए वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देश पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री व्ही. श्रीनिवास राव और श्री अरुण कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन में विशेष टीम गठित की गई। टीम ने दबिश देकर न केवल आरोपियों को पकड़ा, बल्कि ग्राम केशापुर से तेंदुए की खाल भी बरामद की।
गिरफ्तार आरोपियों की सूची:
इस संगठित गिरोह में शामिल मुख्य आरोपी लक्ष्मण तेलाम, देवीराम ओयाम, रमेश कुड़ियाम, फरसोन पोयामी, सेमला रमेश, सुखराम पोडियाम, छत्रू कुड़ियाम, मासो ओयाम और अर्जुन भोगामी को सलाखों के पीछे भेज दिया गया है।
कड़ी धाराओं में मामला दर्ज
वनमंडलाधिकारी दंतेवाड़ा श्री रामकृष्णा ने बताया कि बाघ और तेंदुआ अनुसूची-1 के तहत संरक्षित जीव हैं। इनके शिकार पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की कड़ी धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। सभी आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
मंत्री की चेतावनी: कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा
वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वन्यजीवों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, “शिकार एक गंभीर अपराध है। इसमें शामिल व्यक्ति चाहे किसी भी पद पर क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।”
