छत्तीसगढ़ में नारी सशक्तिकरण की गूँज अब सुदूर ग्रामीण अंचलों में भी सुनाई दे रही है। मनेंद्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी जिला के ग्राम पंचायत रामगढ़ की निवासी श्रीमती सुखमंती बैगा आज आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की एक सशक्त पहचान बन चुकी हैं। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान” से जुड़ने के बाद उनके जीवन में एक क्रांतिकारी बदलाव आया है।
आर्थिक तंगहाली से सम्मानजनक आजीविका तक का सफर
सुखमंती बैगा बताती हैं कि पहले उनके परिवार की आय काफी सीमित थी, जिससे रोजमर्रा की जरूरतों के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता था। बिहान योजना ने उन्हें न केवल आर्थिक सहयोग दिया, बल्कि उनमें नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास का संचार भी किया। वे ‘चंगमाता स्व-सहायता समूह’ की एक सक्रिय सदस्य के रूप में जुड़ीं।
किराना दुकान से मिली नई दिशा
दिसंबर 2020 में सुखमंती को बैंक लिंकेज के माध्यम से 50 हजार रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इस राशि का सदुपयोग करते हुए उन्होंने अपने गाँव में एक छोटी सी किराना दुकान शुरू की। शुरुआती चुनौतियों के बावजूद, बिहान योजना के तहत मिले प्रशिक्षण और समूह के सहयोग से उन्होंने अपने व्यवसाय को मजबूती प्रदान की।
नियमित आय और सामाजिक बदलाव
आज सुखमंती अपनी दुकान से प्रतिमाह 4 से 7 हजार रुपये तक की नियमित आय प्राप्त कर रही हैं। इस आय का उपयोग वे अपने बच्चों की शिक्षा और बेहतर भविष्य के लिए कर रही हैं। आर्थिक मजबूती के साथ-साथ अब वे गाँव की अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूहों से जुड़ने और स्वरोजगार अपनाकर स्वावलंबी बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
सुखमंती बैगा की यह कहानी साबित करती है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो वे समाज में सकारात्मक बदलाव की ध्वजवाहक बन सकती हैं।
