भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: ‘मेक इन इंडिया’ को मिली वैश्विक संजीवनी, रूसी तेल और $500 बिलियन की खरीद पर टिकी निगाहें
नई दिल्ली/वॉशिंगटन, 04 फरवरी 2026
भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच आर्थिक संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई सफल वार्ता के बाद दोनों देशों ने एक व्यापक ‘ट्रेड डील’ की घोषणा की है। इस समझौते ने न केवल दोनों देशों के बीच महीनों से चले आ रहे टैरिफ युद्ध (Tariff War) को समाप्त किया है, बल्कि भारत को चीन और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले अमेरिकी बाजार में बेहतर स्थिति में ला खड़ा किया है।
टैरिफ में भारी कटौती: भारतीय निर्यातकों की जीत
इस समझौते की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि भारतीय उत्पादों पर टैरिफ दरों में आई भारी गिरावट है।
- टैरिफ में कमी: अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर लगने वाले कुल प्रभावी टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया है। इसमें 25% का वह दंडात्मक टैरिफ (Punitive Tariff) भी शामिल है, जो अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने के कारण लगाया था।
- शून्य टैरिफ की ओर: बदले में, भारत अमेरिका से आने वाले उत्पादों पर अपनी टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को धीरे-धीरे कम करते हुए ‘शून्य’ (Zero) के स्तर पर लाने पर सहमत हुआ है।
$500 बिलियन का भारी निवेश और ऊर्जा समझौता
राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, भारत ने अगले पांच वर्षों में 500 बिलियन डॉलर मूल्य की अमेरिकी ऊर्जा, तकनीक, कोयला और कृषि उत्पादों को खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है।
- ऊर्जा शिफ्ट: भारत अब अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूसी तेल पर निर्भरता कम करेगा और अमेरिका व वेनेजुएला जैसे वैकल्पिक स्रोतों से तेल व गैस की खरीद बढ़ाएगा।
- प्रमुख क्षेत्र: इस खरीद में विमानन (Aircraft parts), सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर उपकरण और परमाणु तकनीक जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल होंगे।
कृषि और डेयरी क्षेत्रों को मिला सुरक्षा कवच
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संसद में स्पष्ट किया है कि भारत ने व्यापारिक हितों के साथ-साथ अपने संवेदनशील क्षेत्रों से कोई समझौता नहीं किया है।
- संवेदनशील क्षेत्र सुरक्षित: भारतीय किसानों और डेयरी पशुपालकों के हितों को ध्यान में रखते हुए, इन क्षेत्रों को इस व्यापार समझौते की परिधि से बाहर रखा गया है या उन्हें ‘कोटा-आधारित’ सीमित पहुँच दी गई है।
- प्रतिस्पर्धा में बढ़त: भारत का 18% टैरिफ अब चीन (30-35%), बांग्लादेश (20%) और वियतनाम (19-20%) की तुलना में काफी कम है, जिससे भारतीय टेक्सटाइल, लेदर और इंजीनियरिंग सामानों की मांग बढ़ेगी।
पीएम मोदी का विजन: “डिजाइन और इनोवेट इन इंडिया”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस डील को ‘ऐतिहासिक’ बताते हुए कहा कि यह ‘मेक इन इंडिया’ के साथ-साथ ‘डिजाइन और इनोवेट इन इंडिया’ को भी बढ़ावा देगा। इससे भारतीय MSMEs और कुशल श्रमिकों के लिए अमेरिका जैसे विशाल बाजार में व्यापार करना पहले से कहीं अधिक आसान और किफायती हो जाएगा।
