मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन अब केवल जीविकोपार्जन का साधन नहीं, बल्कि लाभ का व्यवसाय बनता जा रहा है। जशपुर जिले के बगीचा विकासखण्ड के रहने वाले सुखसागर यादव इसका एक जीवंत उदाहरण हैं, जिन्होंने पशुधन विकास विभाग की योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है।
कभी सिर्फ 1 लीटर दूध होता था उत्पादन
योजना का लाभ लेने से पहले सुखसागर एक सामान्य किसान थे और उनके पास केवल एक देसी गाय थी। उस समय प्रतिदिन मात्र 1 लीटर दूध का उत्पादन होता था, जो घर की जरूरतों में ही खत्म हो जाता था। पशुपालन से उन्हें कोई अतिरिक्त आय नहीं होती थी।
अनुदान और नस्ल सुधार का कमाल
पशुधन विकास विभाग ने सुखसागर को ‘राज्य पोषित डेयरी उद्यमिता विकास योजना’ के तहत 70,000 रुपये का अनुदान उपलब्ध कराया।
- इस राशि से उन्होंने एक उन्नत नस्ल की जर्सी गाय और एक साहीवाल क्रॉस गाय खरीदी।
- साथ ही, ‘राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम’ के जरिए उन्होंने अपने पशुओं का नस्ल सुधार कराया।
अब 30 हजार रुपये तक की मासिक आय
वर्तमान में सुखसागर के पास दूध का उत्पादन बढ़कर 16 से 18 लीटर प्रतिदिन हो गया है। दूध बेचने से उन्हें हर महीने 25,000 से 30,000 रुपये की शुद्ध आमदनी हो रही है। विभाग द्वारा उन्हें समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन, कृमि नाशक दवाइयां और मिनरल मिक्सचर भी प्रदान किया जा रहा है।
सुखसागर कहते हैं कि सरकारी मदद ने उन्हें एक साधारण किसान से एक सफल डेयरी उद्यमी बना दिया है। उनके पास अब उन्नत नस्ल की बछिया और बाछा भी हैं, जो भविष्य में उनके व्यवसाय को और विस्तार देंगे।
