शिक्षा और आत्मनिर्भरता की राह में सबसे बड़ी बाधा अक्सर ‘दूरी’ और ‘संसाधन’ बनते हैं। लेकिन जब प्रशासन की नियत साफ हो, तो ये बाधाएं खुद-ब-खुद दूर हो जाती हैं। सरगंवा की रहने वाली कुमिता की कहानी आज छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव की एक जीवंत मिसाल है। उनके लिए मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना ने वह ‘अतिरिक्त समय’ जुटा दिया है, जो अक्सर सफर की थकान और अनिश्चितता में खो जाता था।
लाइब्रेरी और समय के बीच छिड़ी थी जंग
कुमिता वर्तमान में UGC NET जैसी प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा की तैयारी कर रही हैं। एक गंभीर परीक्षार्थी के लिए लाइब्रेरी का शांत माहौल और वहां बिताया गया हर एक मिनट कीमती होता है। कुमिता बताती हैं:
”पहले हमारे क्षेत्र में बसों की भारी किल्लत थी। बस न होने की वजह से मुझे न चाहते हुए भी लाइब्रेरी से बहुत जल्दी निकलना पड़ता था। मन पढ़ाई में लगा रहता था, लेकिन घर पहुँचने की चिंता समय से पहले पैर खींच लेती थी।”
योजना ने बदला मंजर: अब पढ़ाई में ‘एक्स्ट्रा टाइम’
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर शुरू हुई इस योजना ने न केवल सड़कों पर बसें दौड़ाईं, बल्कि छात्रों के मन से असुरक्षा का डर भी निकाल दिया। योजना के लागू होने के बाद अब कुमिता के जीवन में निम्नलिखित सकारात्मक बदलाव आए हैं:
- बेहतर टाइम मैनेजमेंट: बसों की निर्धारित समय-सारणी के कारण कुमिता अब देर तक लाइब्रेरी में पढ़ाई कर पाती हैं।
- सुरक्षा का एहसास: गांव की गलियों तक बस पहुँचने से अब देर शाम घर लौटने में कोई हिचक नहीं होती।
- आर्थिक और मानसिक राहत: सुगम आवाजाही ने परिवहन की चिंता को खत्म कर दिया है, जिससे पूरा ध्यान परीक्षा की तैयारी पर है।
मुख्यमंत्री का जताया आभार
अपनी खुशी साझा करते हुए कुमिता कहती हैं, “अब मैं फिक्स टाइम पर घर पहुँच जाती हूँ। इस बस सेवा ने मुझे पढ़ने के लिए वह एक्स्ट्रा टाइम दे दिया है जिसकी मुझे सबसे ज्यादा जरूरत थी। हमारे मुख्यमंत्री जी की वजह से अब ग्रामीणों और छात्रों को आने-जाने के लिए भटकना नहीं पड़ता।”
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना आज कुमिता जैसे हजारों युवाओं के लिए केवल एक परिवहन सेवा नहीं, बल्कि उनके उज्ज्वल भविष्य की सेतु बन गई है।
