जशपुर: मूक-बधिर बच्चों के सपनों को मिलेगी नई उड़ान! ‘समर्थ आवासीय दिव्यांग केंद्र’ में कक्षा 1 से 8 तक निःशुल्क प्रवेश शुरू

जशपुरनगर, 30 मई 2026

​हर बच्चे का यह अधिकार है कि वह शिक्षा प्राप्त करे और समाज की मुख्यधारा में कदम से कदम मिलाकर चले। इसी सोच को धरातल पर उतारते हुए जशपुर में संचालित ‘समर्थ आवासीय दिव्यांग प्रशिक्षण केंद्र’ विशेष बच्चों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रहा है।

​जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) जशपुर के सहयोग से चल रहे इस केंद्र में अब मूक और श्रवण बाधित बच्चों के लिए नए शैक्षणिक सत्र (2026-27) की प्रवेश प्रक्रिया का शंखनाद कर दिया गया है।

​शिक्षा से लेकर आवास तक सब कुछ निःशुल्क

​अक्सर देखा जाता है कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के माता-पिता उनके भविष्य और पढ़ाई के खर्च को लेकर चिंतित रहते हैं। ‘समर्थ केंद्र’ अभिभावकों की इसी चिंता को दूर करता है। यहां कक्षा 1 से 5 (प्राथमिक स्तर) और कक्षा 6 से 8 (माध्यमिक स्तर) तक के मूक-बधिर बच्चों को प्रवेश दिया जा रहा है।

​सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि इस केंद्र में बच्चों की पढ़ाई से लेकर उनके रहने (आवासीय सुविधा) तक का पूरा खर्च पूरी तरह से निःशुल्क है। यहां बच्चों को न केवल किताबी ज्ञान दिया जाता है, बल्कि उन्हें अपनी अक्षमता को ताकत बनाकर आत्मनिर्भर बनने का प्रशिक्षण भी मिलता है।

​कैसे और कहां करें संपर्क?

​प्रबंधन ने इच्छुक माता-पिता और अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों के बेहतर कल के लिए इस अवसर का लाभ उठाएं। प्रवेश के लिए अभिभावक किसी भी कार्य दिवस में कार्यालयीन समय के दौरान विद्यालय के कार्यालय में सीधे संपर्क कर सकते हैं।

घर बैठे जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर:

किसी भी तरह की दुविधा या जानकारी के लिए आप सीधे इन मोबाइल नंबरों पर कॉल कर सकते हैं:

  • 7999838556
  • 8817116599

​प्रवेश के लिए साथ लाएं ये जरूरी दस्तावेज

​अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि प्रवेश प्रक्रिया को आसान और त्वरित बनाने के लिए वे विद्यालय आते समय निम्नलिखित आवश्यक दस्तावेज अपने साथ जरूर लाएं:

  • ​बच्चे का आधार कार्ड
  • ​यूडीआईडी (UDID) कार्ड (दिव्यांगता प्रमाण पत्र)
  • ​पिछली कक्षा की पास की गई मार्कशीट (अंकसूची)
  • ​बच्चे की 2 नवीनतम पासपोर्ट साइज फोटो

​प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य यही है कि जिले का कोई भी मूक-बधिर बच्चा शिक्षा की रोशनी से वंचित न रहे।

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