सुशासन तिहार 2026: मनोरा के टेम्पू शिविर में उमड़ा 13 गांवों का जनसैलाब, योग-स्वच्छता के साथ ग्रामीणों ने सीखा पानी बचाने का ‘5 प्रतिशत मॉडल’

जशपुरनगर, 30 मई 2026

​मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की दूरगामी सोच और सुशासन की परिकल्पना अब धरातल पर रंग लाने लगी है। आम जनता की समस्याओं का उनके घर के पास ही त्वरित निराकरण करने और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाने के लिए जिले में “सुशासन तिहार 2026” का महाअभियान तेजी से चल रहा है। इसी कड़ी में आज जनपद पंचायत मनोरा के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत टेम्पू में एक भव्य और बहुउद्देशीय सुशासन शिविर का आयोजन किया गया।

​इस शिविर की सबसे खास बात यह रही कि इसमें सिर्फ एक या दो नहीं, बल्कि आस-पास के 13 गांवों की धड़कनें एक साथ नजर आईं। शिविर में टेम्पू सहित सुरजूला, रजला, खुटापानी, घाघरा, करदना, मुटू, पोड़ीपटकोना, चड़िया, सोगड़ा, मनोरा, खोगा और डुमरटोली के ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया और शासन के इस प्रयास को सराहा।

​योग से शुरुआत और स्वच्छता का श्रमदान

​परंपरागत सरकारी शिविरों से इतर, इस सुशासन शिविर की रूपरेखा बेहद मानवीय और समाज को जोड़ने वाली रही। सुबह की शुरुआत शिविर स्थल पर सामूहिक योगाभ्यास के साथ हुई, जहां जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और ग्रामीणों ने एक साथ मिलकर प्राणायाम और आसन किए। इस गतिविधि के जरिए सभी को एक स्वस्थ और तनावमुक्त जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया गया।

​योग के बाद शिविर में मौजूद लोगों ने ‘स्वच्छता ही सेवा’ के भाव को चरितार्थ करते हुए सामूहिक श्रमदान किया। शिविर स्थल और उसके आस-पास की साफ-सफाई कर ग्रामीणों को यह प्रेरित किया गया कि एक स्वस्थ समाज की नींव साफ-सुथरे वातावरण से ही मजबूत होती है।

​पानी बचाने का सिखाया ‘5 प्रतिशत मॉडल’

​बढ़ती गर्मी और भविष्य के जल संकट को भांपते हुए शिविर में जल संरक्षण पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। यहां आए ग्रामीणों को ‘5 प्रतिशत मॉडल’ के जरिए बहुत ही सरल तरीके से वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) और भू-जल स्तर को सुधारने के व्यावहारिक उपाय सिखाए गए।

​शिविर में मौजूद जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों को आगाह करते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ियों को पानी के संकट से बचाने के लिए हमें आज से ही अपने पारंपरिक भूमिगत जल स्रोतों को सहेजना होगा। इसके लिए केवल सरकारी प्रयास काफी नहीं हैं, बल्कि हर ग्रामीण की सामुदायिक सहभागिता और जागरूकता सबसे ज्यादा जरूरी है।

​प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का रहा मजबूत तालमेल

​ग्रामीणों की शिकायतों को सुनने और उनका तत्काल निपटारा करने के लिए मौके पर पूरा प्रशासनिक अमला मुस्तैद रहा। इस मौके पर विकासखंड मनोरा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ), एसडीओ, स्थानीय सरपंच, सचिव, समर्पित स्वच्छाग्रही, बड़ी संख्या में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि, ग्रामीण जन और जनपद पंचायत के कर्मचारी उपस्थित रहे। शिविर ने यह साबित किया कि जब प्रशासन सीधे जनता के द्वार पहुंचता है, तो सुशासन का सपना हकीकत में बदल जाता है।

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