कोरिया।
कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और पथरीली ढलानों के बीच बसे कोरिया जिले के जोबापारा (ग्राम पंचायत कदमनारा) के आदिवासी परिवारों के जीवन में एक स्टॉपडेम ने नई रोशनी भर दी है। पहाड़ी के नीचे बहने वाले नकटी नाले पर बने इस स्टॉपडेम की बदौलत आज गांव के दर्जनभर से अधिक किसान परिवारों के लगभग 30 एकड़ खेतों में धान की फसल लहलहा रही है।
भौगोलिक चुनौतियों के बीच पानी का संकट
कदमनारा ग्राम पंचायत का आश्रित गांव जोबापारा पहाड़ी भूभाग पर बसा हुआ है। जमीन ऊबड़-खाबड़ और ढलान वाली होने के कारण यहाँ खेती करना हमेशा से एक कठिन चुनौती रहा है। गांव के नीचे से नकटी नाला बहता जरूर था, लेकिन ढलान और तेज बहाव की वजह से किसान उस पानी का उपयोग सिंचाई के लिए नहीं कर पाते थे। पानी की कमी के चलते हर साल फसल सूखने का डर बना रहता था।
ग्राम सभा की पहल और मनरेगा से मिली ₹19 लाख की स्वीकृति
सिंचाई की इस समस्या से निजात पाने के लिए जोबापारा के किसानों ने ग्राम पंचायत में नकटी नाले पर स्टॉपडेम बनाने की मांग रखी। ग्राम सभा के प्रस्ताव के आधार पर मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) के तहत 19 लाख रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई। ग्राम पंचायत की सीधी देखरेख में निर्माण कार्य समय पर पूरा कराया गया।
सौर सुजला योजना से खेतों तक पहुंचा पानी
स्टॉपडेम बनने के बाद जल भंडारण सुनिश्चित हुआ, जिसके बाद किसानों ने शासन की ‘सौर सुजला योजना’ का लाभ उठाते हुए सोलर पंप स्थापित किए। अब किसान सौर ऊर्जा और बिजली पंपों के माध्यम से नाले के पानी को ऊपर ढलान वाले खेतों तक आसानी से लिफ्ट कर रहे हैं। इससे न केवल सिंचाई सुगम हुई है, बल्कि डीजल और महंगे साधनों पर निर्भरता भी खत्म हो गई है।
धान के बाद अब गेहूं और सब्जियों की तैयारी
ग्राम पंचायत के सरपंच दयाल साय ने बताया कि पहले तेज बहाव के कारण नाले का पानी बह जाता था, लेकिन अब पर्याप्त पानी रुकने से बारहमासी सिंचाई की राह खुल गई है। खरीफ में धान की भरपूर फसल लेने के बाद अब सभी किसान रबी सीजन में गेहूं और हरी सब्जियों की खेती की तैयारी कर रहे हैं।
इन किसानों के खेतों तक पहुंचा पानी
स्टॉपडेम के निर्माण से गांव के एक दर्जन आदिवासी किसानों को सीधा लाभ मिला है:
- दयाल साय: 5 एकड़
- उमेश कुमार, करण साय, वंश गोपाल, लोधे राम, दखल साय: 3-3 एकड़
- धर्मपाल, राम सिंह, शेषमन: 2-2 एकड़
- श्री गणेश: 1.5 एकड़
- प्रभुदयाल एवं जोखन राम: 1-1 एकड़
पहाड़ी नाले के जल संरक्षण और सौर ऊर्जा के बेहतर समन्वय ने जोबापारा के किसानों को आत्मनिर्भरता और आर्थिक मजबूती की राह पर ला खड़ा किया है।
