किसी जरूरतमंद मां की रसोई में जब जहरीले धुएं की जगह स्वच्छ गैस की नीली लौ जलती है, जब किसी पिता के सिर से बच्चों के दो वक्त के भोजन की चिंता दूर होती है, और जब बस्तर के दुर्गम पहाड़ियों व बीहड़ों को पार कर समय पर राशन व स्वास्थ्य सुविधाएं जनजातीय परिवारों तक पहुंचती हैं—तब शासन की नीतियां केवल कागजी योजना न रहकर संवेदनशील सेवा का जीवंत रूप ले लेती हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ इसी मानवीय दृष्टिकोण को धरातल पर उतारने का माध्यम बना है। यह अभियान केवल योजनाओं का औपचारिक क्रियान्वयन नहीं, बल्कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचकर उसे आत्मसम्मान और सशक्तिकरण देने का राष्ट्रीय संकल्प है।
उज्ज्वला से अन्न सुरक्षा तक: गरीबों के जीवन में आया वास्तविक बदलाव
कल्याणकारी शासन का पैमाना बड़ी घोषणाओं से नहीं, बल्कि आमजन के दैनिक जीवन में आए सकारात्मक बदलाव से तय होता है:
- रसोई में सम्मान और स्वास्थ्य: प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने करोड़ों गरीब परिवारों की महिलाओं को पारंपरिक चूल्हे के धुएं और बीमारियों से मुक्ति दिलाई है। यह केवल एलपीजी सिलेंडर का वितरण नहीं, बल्कि मातृशक्ति के समय की बचत और सम्मानजनक जीवन का आधार बना है।
- खाद्य सुरक्षा का मजबूत सुरक्षा कवच: प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) ने देश और प्रदेश में यह सुनिश्चित किया है कि कोई भी पात्र परिवार भूखा न सोए। राशन कार्ड केवल एक आधिकारिक दस्तावेज नहीं, बल्कि सम्मान के साथ भरपेट भोजन का पक्का भरोसा है।
बस्तर के दुर्गम अंचलों में ‘नियद नेल्लानार’ बना विश्वास का सेतु
छत्तीसगढ़ के संदर्भ में यह सेवा भाव और भी अधिक प्रासंगिक हो जाता है। बस्तर और सुदूर वनांचलों की भौगोलिक विषमताएं अक्सर मूलभूत सुविधाओं की राह में बड़ी बाधा बनती रही हैं।
राज्य में ‘नियद नेल्लानार’ (आपका अच्छा गांव) जैसी दूरदर्शी पहलों के जरिए शासन उन सुदूर ग्रामों तक सीधे राशन, पेयजल और चिकित्सा सुविधाएं पहुंचा रहा है, जो दशकों तक मुख्यधारा से कटे रहे। जब इन बीहड़ों में राशन की गाड़ी या मोबाइल मेडिकल यूनिट पहुंचती है, तो वह केवल सामग्री का वितरण नहीं होता—बल्कि सुशासन और नागरिक के बीच गहरे विश्वास का निर्माण करता है।
‘सेवा मेरा योगदान’: जनभागीदारी से ही बनेगा विकसित भारत@2047
‘सेवा संकल्प अभियान’ का मुख्य संदेश यह है कि विकसित भारत का निर्माण केवल सरकारी तंत्र से संभव नहीं हो सकता। इसके लिए व्यापक जनभागीदारी अनिवार्य है।
- स्वच्छ भारत अभियान और नमामि गंगे ने यह सिद्ध किया है कि स्वच्छता किसी एक विभाग का काम नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का राष्ट्रीय कर्तव्य है।
- नियमित रक्तदान, जल संरक्षण, नदी-घाटों की सफाई, पौधारोपण और आसपास के वंचितों को योजनाओं की जानकारी देना—नागरिकों द्वारा उठाया गया यह हर छोटा कदम राष्ट्र निर्माण की एक मजबूत ईंट है।
सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों की यह यात्रा केवल पिछले कार्यों का उत्सव नहीं, बल्कि आने वाले समय के लिए अपनी नागरिक जिम्मेदारियों को स्वीकार करने का आह्वान है। जब शासन की संवेदनशीलता और समाज का सक्रिय योगदान एक साथ मिलते हैं, तभी ‘सेवा से संकल्प और संकल्प से विकसित भारत’ का मार्ग प्रशस्त होता है।
