जशपुर कलेक्ट्रेट में सजा ‘जनदर्शन’: कलेक्टर रोहित व्यास ने खुद सुनीं 34 फरियादें, अधिकारियों से कहा— ‘समस्या सुलझाएं और आवेदक को भी दें अपडेट’

जशपुरनगर, 26 मई 2026

​आम जनता की तकलीफों को सीधे सुनने और प्रशासन की जवाबदेही तय करने के लिए मंगलवार को जशपुर जिला कार्यालय में ‘जनदर्शन’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कलेक्ट्रेट पहुंचे दूर-दराज के ग्रामीणों और आम नागरिकों के बीच खुद कलेक्टर श्री रोहित व्यास मौजूद रहे। उन्होंने एक-एक कर लोगों से मुलाकात की, उनकी व्यक्तिगत और सामूहिक समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनके आवेदनों पर तुरंत एक्शन लिया।

​कलेक्टर ने मौके पर मौजूद विभिन्न विभागों के अधिकारियों को दो टूक शब्दों में निर्देश दिए कि जनता के इन आवेदनों को केवल फाइलों में न दबाया जाए, बल्कि इनका त्वरित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण समाधान (Quality Resolution) सुनिश्चित किया जाए।

34 अर्जियों पर तुरंत एक्शन: राजस्व, सड़क और पेंशन के मामले रहे प्रमुख

​आज के जनदर्शन में जिले के अलग-अलग कोनों से कुल 34 आवेदन प्रशासन के सामने आए। इनमें लोगों ने अपनी बुनियादी जरूरतों और प्रशासनिक अड़चनों को लेकर गुहार लगाई। प्रमुख रूप से ये मामले शामिल रहे:

  • ​ज़मीन-जायदाद से जुड़े राजस्व (Revenue) के मामले।
  • ​गांवों और वार्डों में स्वच्छता, साफ-सफाई तथा अधोसंरचना निर्माण (सड़क-नाली) की मांग।
  • ​आजीविका उन्नयन (रोजगार) और सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी शासकीय योजनाओं के लाभ से वंचित लोगों के आवेदन।

​कलेक्टर श्री व्यास ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन आवेदनों को ‘प्रायोरिटी’ (प्राथमिकता) लिस्ट में डालें और तय समय-सीमा के भीतर इनका हर हाल में निराकरण करें।

नया नियम: “काम क्या हुआ, यह फरियादी को भी पता चलना चाहिए”

​अक्सर देखा जाता है कि लोग आवेदन देकर चले जाते हैं, लेकिन उन्हें पता ही नहीं चलता कि उनकी समस्या पर क्या कार्यवाही हुई। इस बार कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने इस व्यवस्था को बदलने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आवेदन पर जो भी एक्शन लिया गया है, उसकी प्रगति (Status) की स्पष्ट और समय पर जानकारी संबंधित आवेदक को जरूर उपलब्ध कराई जाए। इससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और जनता का भरोसा बढ़ेगा।

कलेक्टर का संवेदनशील रुख:

कलेक्टर ने विशेष रूप से आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी सुविधाओं—जैसे पीने का पानी (पेजल), सड़क, साफ-सफाई और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं—पर संवेदनशीलता और पूरी जवाबदेही के साथ काम करने पर जोर दिया, ताकि किसी भी नागरिक को दफ्तरों के बेवजह चक्कर न काटने पड़ें।

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