दशकों के लंबे इंतजार के बाद, पश्चिम बंगाल आखिरकार भारत के तेल और गैस उत्पादन मानचित्र पर मजबूती से अपना नाम दर्ज कराने जा रहा है। ओएनजीसी (ONGC) द्वारा साल 2018 में उत्तर 24 परगना जिले में खोजी गई राज्य की पहली तेल खदान—अशोकनगर ऑयल फील्ड—अब पूरी तरह से एक्शन में आने को तैयार है। यह सिर्फ एक खदान नहीं, बल्कि भारत को ‘ऊर्जा’ के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी कदम है।
45,000 करोड़ का खजाना और 240 मिलियन बैरल तेल
इस ऑयल फील्ड को लेकर जो आंकड़े सामने आए हैं, वो किसी को भी हैरान कर सकते हैं। जमीन के नीचे छिपे इस खजाने की कुल कीमत लगभग 45,000 करोड़ रुपये आंकी गई है। अनुमान है कि यहां करीब 240 मिलियन (24 करोड़) बैरल कच्चा तेल (Crude Oil) मौजूद है।
इस तेल की सबसे खास बात इसकी उच्च गुणवत्ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अशोकनगर से निकलने वाले तेल की क्वालिटी दुनिया के सबसे बेहतरीन ‘ब्रेंट क्रूड’ के समकक्ष है। यह एक हल्की किस्म (Light API gravity) का तेल है, जिससे रिफाइनरियों में पेट्रोल और डीजल बनाना ज्यादा आसान और सस्ता होता है।
कैसे मिली इस गेम-चेंजर प्रोजेक्ट को ‘हरी झंडी’?
इस प्रोजेक्ट को व्यावसायिक रूप से शुरू करने में पेट्रोलियम माइनिंग लीज (PML) सहित कई प्रशासनिक पेंच फंसे हुए थे, जिसके कारण उत्पादन में देरी हो रही थी। लेकिन हाल ही में दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण और पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष श्री समिक भट्टाचार्य के बीच हुई एक बेहद अहम और सकारात्मक मुलाकात के बाद इस मेगा प्रोजेक्ट को अंततः हरी झंडी मिल गई है। प्रशासनिक बाधाएं दूर होने से अब ओएनजीसी यहां तेजी से ड्रिलिंग और कमर्शियल उत्पादन शुरू कर सकेगी।
क्या इससे आम आदमी को मिलेगी पेट्रोल-डीजल के दामों से राहत?
आज जब पेट्रोल-डीजल की कीमतें आम आदमी का बजट बिगाड़ रही हैं, तो यह सवाल लाजमी है कि क्या अशोकनगर के तेल से कीमतें कम होंगी?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। अशोकनगर ऑयल फील्ड के शुरू होने से रातों-रात कीमतें आधी भले न हों, लेकिन इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार और आयात (Import) पर हमारी निर्भरता जरूर कम होगी। कच्चे तेल के आयात बिल में कमी आने से देश की विदेशी मुद्रा बचेगी, जिससे भविष्य में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने और महंगाई को काबू में करने में सरकार को बड़ी मदद मिलेगी।
पूर्वी भारत के लिए आर्थिक संजीवनी
यह सिर्फ कच्चे तेल का कुआं नहीं है, बल्कि पूर्वी भारत के लिए एक आर्थिक संजीवनी है। इस प्रोजेक्ट के शुरू होने से:
- क्षेत्र में युवाओं के लिए रोजगार के हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष अवसर पैदा होंगे।
- पश्चिम बंगाल सरकार को रॉयल्टी के रूप में भारी राजस्व (लगभग ₹4,500 करोड़) मिलने की उम्मीद है, जिसे राज्य के विकास में लगाया जा सकेगा।
’मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत मिली यह कामयाबी साबित करती है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को खुद पूरा करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। अशोकनगर अब सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि भारत की तरक्की का एक नया पावर-हब बनने जा रहा है।
