अबूझमाड़ के अंतिम छोर तक पहुँचा ‘विकास का अमृत’: महाराष्ट्र सीमा पर बसे नेलांगुर के हर घर में अब नल से आ रहा पानी

छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल और अबूझमाड़ के दुर्गम इलाकों में अब बदलाव की बयार बहने लगी है। नारायणपुर जिले के ओरछा ब्लॉक का अंतिम सीमावर्ती गाँव नेलांगुर, जो कभी नक्सल संवेदनशीलता के लिए जाना जाता था, आज विकास की एक नई इबारत लिख रहा है। महाराष्ट्र की सीमा से सटे इस गाँव में पहली बार जल जीवन मिशन के तहत घर-घर नल पहुँच गया है, जिससे दशकों पुराना पेयजल संकट खत्म हो गया है।

52 किमी दूर, जहाँ कभी पहुँचना था मुश्किल

​जिला मुख्यालय से लगभग 52 किलोमीटर दूर घने जंगलों के बीच बसे नेलांगुर के ग्रामीणों के लिए साफ पानी किसी सपने जैसा था। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की विशेष पहल और विकास के प्रति संकल्प का परिणाम है कि आज यहाँ सोलर पंप के जरिए निर्बाध जल आपूर्ति हो रही है। बिजली की कमी यहाँ बाधा न बने, इसके लिए सोलर सिस्टम का इस्तेमाल कर सीधे घरों तक पाइपलाइन बिछाई गई है।

महिलाओं को मिली ‘मशक्कत’ से आजादी

​इस योजना का सबसे बड़ा प्रभाव गाँव की महिलाओं पर पड़ा है। कलेक्टर नम्रता जैन के अनुसार, पहले महिलाओं को पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी और पथरीले रास्तों पर भटकना पड़ता था। अब घर के आंगन में ही पानी उपलब्ध होने से उनके समय की बचत हो रही है और दैनिक जीवन में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है।

अबूझमाड़ में लौट रहा विश्वास

​कभी अतिसंवेदनशील कहे जाने वाले इस क्षेत्र में शासन की योजनाओं का पहुँचना प्रशासन और जनता के बीच बढ़ते विश्वास का प्रतीक है। ग्रामीणों का कहना है कि नल से पानी आना सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि हमारे लिए सम्मान का विषय है। इससे न केवल स्वास्थ्य और स्वच्छता में सुधार होगा, बल्कि क्षेत्र में अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए भी नए रास्ते खुलेंगे।

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