जशपुरनगर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के कुशल नेतृत्व में जशपुर जिला मत्स्य पालन के क्षेत्र में प्रदेश का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और किसानों के अथक परिश्रम का परिणाम है कि जिले में मत्स्य उत्पादन अब केवल पोषण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह ग्रामीण स्वरोजगार का सबसे सशक्त माध्यम बन गया है।
आंकड़ों में सफलता की कहानी अप्रैल 2024 से मई 2026 के बीच जिले ने अभूतपूर्व प्रगति की है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार:
- मत्स्य उत्पादन: कुल 21,119 मीट्रिक टन।
- बीज उत्पादन: 18.50 करोड़ स्पॉन और 2.55 करोड़ स्टे.फ्राय उत्पादन।
- बुनियादी ढांचा: लगभग 80 हेक्टेयर ग्रामीण तालाबों और जलाशयों का पट्टा आवंटन कर मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया गया।
किसानों को मिला सरकारी योजनाओं का ‘कवच’ मत्स्य पालकों की सुरक्षा और प्रोत्साहन के लिए शासन ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। 13,989 मछुआरों को मत्स्यजीवी दुर्घटना बीमा योजना के तहत कवर किया गया है। साथ ही, 19 मछुआ सहकारी समितियों को अनुदान देकर उन्हें आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाया गया है। जिले में अनुसूचित जाति, जनजाति और सामान्य वर्ग के लगभग 800 लाभार्थियों को 50 प्रतिशत अनुदान पर फिंगरलिंग (मछली बीज) उपलब्ध कराए गए हैं।
पीएम मत्स्य संपदा योजना: अर्थव्यवस्था का आधार प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ने जिले में ‘नीली क्रांति’ को नई गति दी है। इस योजना के माध्यम से:
- अनुदान की सुविधा: महिलाओं और SC/ST वर्ग के हितग्राहियों को 60% तथा सामान्य/OBC वर्ग को 40% तक का अनुदान दिया जा रहा है।
- नवाचार: जिले में 26 हेक्टेयर में निजी तालाब निर्माण और 110 इकाइयों में झींगा पालन की शुरुआत हुई है।
- आधुनिक तकनीक: ‘बायोफ्लॉक पॉन्ड लाइनर’ जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग से कम जगह में अधिक उत्पादन सुनिश्चित किया जा रहा है।
विविधता और रोजगार के नए अवसर जिले में न केवल पारंपरिक मछली पालन, बल्कि झींगा पालन और फुटकर मछली विक्रय योजना (335 लाभार्थी) के माध्यम से बाजार व्यवस्था को भी सुधारा गया है। 712 हितग्राहियों को नाव और जाल वितरित किए गए हैं, जिससे उनकी कार्यक्षमता में वृद्धि हुई है।
“शासन की नीतियों का उद्देश्य हर हाथ को काम और हर किसान को सम्मान देना है। जशपुर में मत्स्य पालन की यह उपलब्धि इसी विजन का परिणाम है।” > — प्रशासनिक संदेश
