पक्के घर की छत मिली तो अब बारिश की बूंदों से डर नहीं लगता

बरसात का मौसम जहाँ कई लोगों के लिए खुशियाँ लेकर आता है, वहीं ग्रामीण इलाकों में कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों के लिए यह किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होता। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिले के ग्राम पंचायत गिरारी के रहने वाले मदन का जीवन भी वर्षों तक ऐसी ही चिंताओं के साये में बीता। लेकिन आज, मदन का चेहरा एक अलग ही सुकून और आत्मविश्वास से चमक रहा है।

कच्ची दीवारों और टपकती छत का वो दौर

​मदन बताते हैं कि पहले उनका परिवार एक पुराने कच्चे मकान में रहता था। घर की हालत ऐसी थी कि मानसून शुरू होते ही परिवार की रातों की नींद उड़ जाती थी। छत से पानी टपकना और दीवारों में नमी आ जाना आम बात थी। हर साल बरसात उनके लिए असुरक्षा और डर का पर्याय बन जाती थी।

योजना ने दिया सपनों को आधार

​मदन के जीवन में बदलाव की शुरुआत वर्ष 2024-25 में हुई, जब उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत पक्का घर स्वीकृत हुआ। शासन से मिली आर्थिक सहायता और मदन के खुद के कड़े परिश्रम ने मिलकर ईंट-दर-ईंट उनके सपनों को हकीकत में बदलना शुरू किया। आज उसी जगह पर एक मजबूत और सुरक्षित पक्का घर खड़ा है।

​”पहले बारिश शुरू होते ही डर लगता था कि घर कब जवाब दे जाए। पानी भरने की वजह से बच्चों को संभालना मुश्किल होता था। पर अब पक्का घर बनने के बाद हम चैन से सो पाते हैं। शासन की इस मदद ने हमें सिर्फ घर नहीं, सम्मान भी दिया है।”

मदन, लाभार्थी (ग्राम गिरारी)

बदल रहा है ग्रामीण परिवेश

​मदन की यह कहानी केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि कैसे सरकारी योजनाएं धरातल पर पहुंचकर लोगों का जीवन स्तर सुधार रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) न केवल सुरक्षित छत प्रदान कर रही है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के भीतर स्थायित्व और सुरक्षा का भाव भी जगा रही है।

​आज मदन का परिवार एक व्यवस्थित घर में रहकर अपने भविष्य की नई योजनाएं बना रहा है। यह बदलाव गिरारी जैसे कई गांवों में देखा जा सकता है, जहाँ पक्के मकानों की कतारें अब ग्रामीण विकास की नई इबारत लिख रही हैं।

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