राज्यपाल की संवेदनशीलता: विशेष बच्चों की मुस्कान के लिए रमेन डेका ने बढ़ाया हाथ; एम्स में शुरू हुआ खास डेंटल ट्रीटमेंट

छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के प्रति अपनी संवेदनशीलता का परिचय देते हुए एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। राजभवन और स्वास्थ्य सुविधाओं के बीच की दूरी को कम करते हुए, राज्यपाल की पहल पर अब रायपुर एम्स (AIIMS) में इन बच्चों को विशिष्ट दंत चिकित्सा सेवाएं सुलभ हो रही हैं।

स्वेच्छानुदान से मिली उपचार की नई शक्ति

​कुछ समय पूर्व, राज्यपाल श्री रमेन डेका ने विशेष बच्चों के दंत रोगों के जटिल उपचार के लिए अपने स्वेच्छानुदान से 5 लाख रुपए की राशि एम्स के दंत रोग चिकित्सा विभाग को प्रदान की थी। इस राशि का उपयोग उन बच्चों के इलाज के लिए किया जा रहा है जिन्हें सामान्य क्लिनिकों में उपचार कराने में कठिनाई होती है।

जब खुद हाल-चाल जानने बच्चों के बीच पहुंचे राज्यपाल

​आज राज्यपाल श्री रमेन डेका स्वयं एम्स पहुंचे और दंत रोग विभाग का सूक्ष्मता से अवलोकन किया। इस दौरान एक बेहद मानवीय दृश्य देखने को मिला जब राज्यपाल ने वहां उपचार कराने आए विशेष बच्चों के पास बैठकर उनसे बातें कीं और उनके स्वास्थ्य का हाल जाना।

​उन्होंने बच्चों के परिजनों से भी चर्चा की और यह जानने की कोशिश की कि क्या उन्हें उपचार के दौरान किसी प्रकार की समस्या का सामना तो नहीं करना पड़ रहा है। परिजनों ने इस मदद के लिए राज्यपाल के प्रति आभार व्यक्त किया।

गुणवत्तापूर्ण इलाज ही प्राथमिकता

​एम्स के चिकित्सकों और अधिकारियों के साथ चर्चा करते हुए राज्यपाल ने कहा:

​”विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और सहज स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी और प्राथमिकता होनी चाहिए। दांतों की बीमारियां इन बच्चों के लिए काफी कष्टदायक होती हैं, और एम्स में चल रही इस पहल से उनके जीवन की गुणवत्ता में निश्चित ही सुधार आएगा।”

सुधार की दिशा में बड़ा कदम

​एम्स के दंत विभाग में राज्यपाल की इस ग्रांट से अत्याधुनिक सुविधाओं और विशेष देखभाल के साथ बच्चों का इलाज किया जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, कई मामलों में विशेष बच्चों को बेहोशी या विशेष निगरानी में इलाज की जरूरत होती है, जिसमें यह अनुदान बहुत मददगार साबित हो रहा है।

​राज्यपाल के इस दौरे ने न केवल अस्पताल के स्टाफ का उत्साह बढ़ाया, बल्कि उन परिवारों को भी संबल दिया जो अपने बच्चों के इलाज के लिए संघर्ष कर रहे थे।

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