फाइलों के अंबार से ‘डिजिटल रफ्तार’ तक: छत्तीसगढ़ में ई-ऑफिस ने बदली सुशासन की परिभाषा

छत्तीसगढ़ के सरकारी दफ्तरों में अब धूल फांकती फाइलें और लाल फीताशाही का दौर इतिहास बनने जा रहा है। राज्य की प्रशासनिक मशीनरी में एक बड़ा बदलाव आया है, जिसका नाम है ‘ई-ऑफिस’। यह केवल एक सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के उस संकल्प का प्रतिबिंब है, जहाँ ‘सुशासन’ का अर्थ है—तेजी, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था।

भ्रष्टाचार पर चोट, पारदर्शिता को बढ़ावा

​ई-ऑफिस प्रणाली लागू होने से अब फाइलों में हेराफेरी की गुंजाइश खत्म हो गई है। मुख्यमंत्री का स्पष्ट मानना है कि डिजिटल फाइलें जवाबदेही तय करती हैं। अब एक क्लिक पर यह पता चल जाता है कि कौन सी फाइल किस अधिकारी की टेबल पर कितने दिनों से अटकी है। इससे न केवल काम की गति बढ़ी है, बल्कि अधिकारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित हुई है।

सक्ती जिले ने गाड़े सफलता के झंडे

​राज्य में इस डिजिटल क्रांति का सबसे चमकदार उदाहरण सक्ती जिला बनकर उभरा है। 30 अप्रैल 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, सक्ती जिले ने 15,735 फाइलों का डिजिटल संचालन कर प्रदेश के सभी 33 जिलों को पीछे छोड़ दिया है। पूरे राज्य की बात करें तो:

  • 87,222 से अधिक कर्मचारी-अधिकारी इस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं।
  • 5,46,903 से अधिक फाइलों का डिजिटल मूवमेंट हो चुका है।

पर्यावरण और जेब दोनों को फायदा

​इस प्रणाली का एक मानवीय और पर्यावरणीय पक्ष भी है। कागज का इस्तेमाल कम होने से जहाँ हजारों पेड़ों को कटने से बचाया जा रहा है, वहीं फाइलों के भौतिक रखरखाव और परिवहन पर होने वाला सरकारी खर्च भी कम हुआ है। अब न फाइल फटने का डर है और न ही खोने का तनाव।

“यह तकनीकी सुधार केवल सिस्टम को अपडेट करने के लिए नहीं है, बल्कि यह नागरिक-केंद्रित प्रशासन की ओर बढ़ता हमारा एक ठोस कदम है। हमारा लक्ष्य शत-प्रतिशत डिजिटल प्रशासन है।”

विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़

तकनीकी मजबूती और प्रशिक्षण

​इस मिशन को सफल बनाने में NIC और CHiPS की टीमें रीढ़ की हड्डी साबित हो रही हैं। कर्मचारियों को इस नई व्यवस्था के अनुकूल बनाने के लिए चरणबद्ध तरीके से ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि तकनीक बाधा न बने बल्कि माध्यम बने।

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