जशपुर: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) पहाड़ी कोरवा और बिरहोर परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशासन लगातार जमीनी स्तर पर काम कर रहा है। इसी कड़ी में कलेक्टर श्री रोहित व्यास के मार्गदर्शन में कुनकुरी विकासखंड के ग्राम बेहराखार में एक विशेष पशु चिकित्सा सह जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
यह आयोजन पशुधन विकास विभाग (जशपुर) और ‘BAIF डेवलपमेंट रिसर्च फाउंडेशन’ की हाई इम्पैक्ट मेगा वाटर परियोजना के संयुक्त तत्वावधान में 20 मई 2026 को किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण पशुपालकों को उनके घर के आस-पास ही पशु स्वास्थ्य सेवाएं देना और उन्हें विभागीय योजनाओं से जोड़कर उनकी आजीविका को बेहतर बनाना था।
सैकड़ों पशुओं का हुआ मुफ्त इलाज
ग्रामीण इलाकों में पशुपालन आय का एक प्रमुख जरिया है, लेकिन सही समय पर इलाज न मिलने से पशुपालकों को नुकसान उठाना पड़ता है। इस शिविर में पशुओं के स्वास्थ्य की बारीकी से जांच की गई। इस दौरान 171 बकरियों का टीकाकरण किया गया और 171 को कृमिनाशक (डी-वॉर्मिंग) दवा पिलाई गई। इसके अलावा 110 बीमार पशुओं के लिए जरूरी औषधियों का मुफ्त वितरण किया गया, जिससे सीधे तौर पर 36 ग्रामीण पशुपालक लाभान्वित हुए।
आय और पोषण के लिए किया गया जागरूक
शिविर सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं था, बल्कि यह ग्रामीणों की काउंसलिंग का भी एक मंच बना। पशुपालन विभाग और परियोजना दल के विशेषज्ञों ने बेहराखार के बिरहोर समुदाय को समझाया कि कैसे वे बैकयार्ड कुक्कुट (मुर्गी पालन) और उन्नत पशुपालन के जरिए अपनी आय बढ़ा सकते हैं। साथ ही, उन्हें पशुओं के प्रबंधन, मौसमी बीमारियों से बचाव और नियमित टीकाकरण के फायदों के बारे में भी विस्तार से बताया गया।


24 घंटे के भीतर मिली योजना की सौगात
इस शिविर की सबसे खास बात प्रशासन का त्वरित एक्शन (Quick Action) रहा। शिविर के दौरान बिरहोर समुदाय के 12 लोगों ने बैकयार्ड कुक्कुट पालन के लिए आवेदन दिया था। प्रशासन ने इन आवेदनों पर तुरंत कार्यवाही की और अगले ही दिन, 21 मई 2026 को ‘कलिबा सुशासन तिहार’ के कार्यक्रम में इन सभी हितग्राहियों को कुक्कुट का वितरण कर दिया गया।
इस वितरण कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य श्रीमती अनिता सिंह, पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री उपेन्द्र यादव और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) श्री अभिषेक कुमार मौजूद रहे। प्रशासन की इस त्वरित पहल से ग्रामीण काफी उत्साहित हैं और यह उम्मीद जताई जा रही है कि इससे इस पिछड़े इलाके में आजीविका के नए रास्ते खुलेंगे।
