जशपुर के गांवों में ‘सौर ऊर्जा’ से आई नई रोशनी: पिछले दो वर्षों में CREDA ने बदल दी हजारों किसानों और ग्रामीणों की तकदीर

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में विकास की एक नई इबारत लिखी जा रही है, और इस बदलाव का सबसे बड़ा सूत्रधार बना है—’क्रेडा विभाग’ (CREDA)। पिछले दो वर्षों में सौर ऊर्जा (Solar Energy) के प्रभावी उपयोग ने जशपुर के दूरस्थ अंचलों तक वह सुविधाएं पहुंचाई हैं, जो कभी बिजली बिल और लंबी लाइनों के अभाव में अधूरी रहती थीं।

किसानों के लिए वरदान: 800 सोलर पंपों ने दी बिजली बिल से आजादी

खेती-किसानी के लिए पानी की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती होती है। ‘सौर सुजला योजना’ के तहत जिले में बीते दो साल में 800 सोलर पंप स्थापित किए गए हैं। इन पंपों ने न केवल किसानों को महंगे डीजल और बिजली बिल के झंझट से मुक्त किया है, बल्कि उन्हें सालभर खेती करने का हौसला भी दिया है। अब किसान अपनी मर्जी से सिंचाई कर पा रहे हैं, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी और लागत में कमी आई है।

पीने के साफ पानी की राह हुई आसान

जल जीवन मिशन के तहत क्रेडा ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जिले के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में 114 सोलर ड्यूल पंप लगाए गए हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा महिलाओं को हुआ है, जिन्हें अब पानी के लिए कोसों दूर नहीं भटकना पड़ता। घर के पास ही स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होने से जीवन स्तर में बड़ा सुधार आया है।

चौराहों पर उजयारा: 80 सोलर हाई मास्ट से बढ़ी सुरक्षा

गांव की गलियां और शहर के मुख्य चौक अब रात के अंधेरे में भी सुरक्षित महसूस होते हैं। पिछले दो वर्षों में जिले में 80 सोलर हाई मास्ट लाइटें लगाई गई हैं। इन लाइटों की खासियत यह है कि बिजली कटने के बाद भी ये पूरी रात निर्बाध रोशनी देती हैं। इससे न केवल दुर्घटनाएं कम हुई हैं, बल्कि देर शाम आवागमन करने वाले ग्रामीणों और राहगीरों में सुरक्षा का भाव भी बढ़ा है।

मुख्यमंत्री का मार्गदर्शन और समावेशी विकास

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के विजन का ही परिणाम है कि जशपुर में अब अक्षय ऊर्जा (Green Energy) को बुनियादी सुविधाओं का आधार बनाया जा रहा है। क्रेडा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सौर ऊर्जा का यह मॉडल न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।

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