‘आशीर्वाद का दीया’: पीएम मोदी के 25 वर्षों के सेवा संकल्प के प्रति जनमानस का आभार, 17 सितंबर को घर-घर जगमगाएगी आस्था की रोशनी

  • गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री तक, सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों की सेवा-यात्रा का उत्सव
  • जनधन, आवास, आयुष्मान और डिजिटल इंडिया जैसी योजनाओं से आम नागरिक के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों को रेखांकित करता अभियान
  • ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प के साथ जनभागीदारी और आभार की सामूहिक अभिव्यक्ति बनेगा दीपोत्सव

रायपुर (16 सितम्बर 2026):

कुछ अवसर केवल कैलेंडर की तारीख नहीं होते, बल्कि स्मृतियों, भावनाओं और सामूहिक संकल्पों को एक सूत्र में पिरोने वाले ऐतिहासिक पड़ाव बन जाते हैं। 17 सितंबर ऐसा ही एक अवसर है, जब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के साथ उनकी निरंतर 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा-यात्रा का संदर्भ जुड़ रहा है। वर्ष 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शुरू हुए प्रशासनिक सफर से लेकर देश के प्रधानमंत्री के रूप में निरंतर जनसेवा तक, यह कालखंड भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज है।

इस ऐतिहासिक अवसर को जनमानस के आभार और संकल्प से जोड़ने के लिए ‘आशीर्वाद का दीया’ अभियान शुरू किया गया है। 17 सितंबर की शाम घर-घर प्रज्ज्वलित होने वाला यह दीप बीते ढाई दशकों की सेवा-यात्रा के प्रति आभार और आने वाले भारत की आकांक्षाओं का सशक्त प्रतीक बनेगा।

बुनियादी सुविधाओं से नागरिक जीवन की गरिमा तक का सफर

बीते वर्षों में केंद्र सरकार की नीतियों और योजनाओं ने विकास की मुख्यधारा को देश के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया है:

  • वित्तीय समावेशन व पारदर्शिता: प्रधानमंत्री जन-धन योजना, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) और डिजिटल इंडिया ने करोड़ों वंचितों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़कर आर्थिक लेन-देन को पारदर्शी बनाया।
  • सम्मान और बुनियादी अधिकार: स्वच्छ भारत मिशन के शौचालय, उज्ज्वला योजना का स्वच्छ रसोई गैस कनेक्शन, जल जीवन मिशन से हर घर नल का जल और पीएम आवास योजना से मिले पक्के घरों ने गरीब परिवारों को सम्मानजनक जीवन दिया।
  • स्वास्थ्य व सामाजिक सुरक्षा: आयुष्मान भारत योजना ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए सुरक्षा कवच प्रदान किया।
  • किसान और युवा कल्याण: पीएम-किसान सम्मान निधि से अन्नदाताओं को संबल मिला, वहीं स्टार्टअप इंडिया और ‘मेक इन इंडिया’ ने युवाओं को रोजगार खोजने वाले के बजाय रोजगार देने वाला उद्यमी बनने के लिए प्रेरित किया।

आभार के साथ ‘विकसित भारत 2047’ का सामूहिक संकल्प

अभियान के समन्वयकों के अनुसार, ‘आशीर्वाद का दीया’ केवल रोशनी का साधन नहीं, बल्कि “सेवा के प्रति आभार, वर्तमान के प्रति जिम्मेदारी और विकसित भारत 2047 के लिए सामूहिक संकल्प” का प्रतीक है।

स्वतंत्रता की शताब्दी तक देश को पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने की परिकल्पना केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है; इसमें किसान, महिला, युवा, श्रमिक और उद्यमियों की समान सहभागिता आवश्यक है। 17 सितंबर की शाम जब एक दीप से दूसरा दीप जुड़ेगा, तो वह इस विश्वास को सशक्त करेगा कि राष्ट्र निर्माण सामूहिक जनभागीदारी की सतत प्रक्रिया है।

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