निर्माण श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा पर मंथन: मुंबई में दो दिवसीय राष्ट्रीय BOCW सम्मेलन आयोजित, छत्तीसगढ़ ने साझा किए नवाचार

रायपुर: देश के निर्माण क्षेत्र में कार्यरत करोड़ों श्रमिकों के कल्याण, अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा तंत्र को अभेद्य बनाने के उद्देश्य से मुंबई में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन (National Conference on BOCW) आयोजित किया गया। 11 और 12 सितंबर को आयोजित इस राष्ट्रीय महामंथन में देशभर के भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकारों (BOCW) के सुरक्षित, गरिमापूर्ण और आत्मनिर्भर भविष्य की रूपरेखा तय की गई।

केंद्रीय नेतृत्व और राज्यों की उच्चस्तरीय सहभागिता

सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने की। इस दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे, मध्यप्रदेश के श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, छत्तीसगढ़ के श्रम सचिव हिम शिखर गुप्ता समेत देश के विभिन्न राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के श्रम मंत्री, प्रशासनिक अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हुए।

छत्तीसगढ़ मंडल ने रखी अपनी बात

सम्मेलन में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व ‘छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल’ के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह और मंडल सचिव गिरीश रामटेके ने किया। छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधियों ने राज्य में निर्माण श्रमिकों के हित में चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं, डिजिटल पहलों और मैदानी स्तर पर लागू श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों (Best Practices) को राष्ट्रीय मंच पर साझा किया।

सम्मेलन के प्रमुख बिंदु और कार्ययोजना:

  • कल्याणकारी योजनाओं का दायरा: निर्माण श्रमिकों तक स्वास्थ्य, पेंशन, शिक्षा और दुर्घटना बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की शत-प्रतिशत पहुंच सुनिश्चित करना।
  • तकनीक आधारित सेवाएं: श्रमिकों के आसान ऑनलाइन पंजीकरण, कल्याण कोष (BOCW Fund) की पारदर्शी निगरानी और डीबीटी (DBT) के माध्यम से त्वरित सहायता पहुंचाना।
  • क्रॉस-लर्निंग व नवाचार: विभिन्न राज्यों द्वारा श्रमिकों के उत्थान के लिए किए जा रहे सफल नवाचारों का अध्ययन कर उन्हें अन्य राज्यों में भी लागू करने पर सहमति बनी।
  • अंतिम छोर तक लाभ: अंतर-राज्यीय प्रवासी निर्माण श्रमिकों को कार्यस्थल पर ही योजनाओं का लाभ दिलाने और श्रम चौपालों के जरिए निरंतर संपर्क बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया।

यह दो दिवसीय सम्मेलन केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर निर्माण श्रमिकों के समग्र विकास और उनकी सामाजिक सुरक्षा को धरातल पर अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

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