जगदलपुर/बस्तर:
बस्तर की पहचान अब बदल रही है। जिस नेतानार इलाके को कभी धुर नक्सल प्रभावित माना जाता था, वहां अब विकास की ‘डिजिटल सरकार’ पहुंच चुकी है। सोमवार को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह बस्तर जिले के नेतानार ग्राम स्थित सीआरपीएफ (CRPF) कैंप पहुंचे। यहां उन्होंने ग्रामीणों को एक ही छत के नीचे तमाम नागरिक सुविधाएं देने के लिए ‘शहीद वीर गुंडाधूर सेवा डेरा’ (जन सुविधा केंद्र) का विधि-विधान से उद्घाटन किया।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा और मुख्य सचिव श्री विकासशील सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
जब गृहमंत्री ने चखा बस्तर की इमली का स्वाद
दौरे के दौरान एक बेहद आत्मीय और दिलचस्प पल तब आया जब गृहमंत्री शाह इमली प्रसंस्करण केंद्र पहुंचे। वहां प्रशिक्षण ले रही स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने उन्हें अपने द्वारा तैयार उत्पाद दिखाए। महिलाओं के आग्रह पर अमित शाह ने बस्तर की इमली का स्वाद चखा।
मुस्कुराते हुए गृहमंत्री ने कहा:
”यहाँ की इमली का स्वाद खट्टा नहीं, बल्कि बहुत मीठा है। इसमें बस्तर के लोगों के श्रम और आत्मीयता की मिठास घुली हुई है।”
गुंडाधूर महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती लंबी नाग ने गृहमंत्री को बताया कि इस समूह से जुड़कर महिलाएं उच्च गुणवत्ता वाला इमली पल्प तैयार कर रही हैं, जिससे वे सालाना 1 लाख रुपये तक की अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगी।
10 किलोमीटर के पैदल सफर से मिली मुक्ति, गांव में ही पहुंचा ‘डिजिटल सेतु’
गृहमंत्री इसके बाद ‘सेवा सेतु केंद्र’ पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात स्थानीय ग्रामीण महिलाओं से हुई। विकास की इस नई बयार से ग्रामीणों के जीवन में कितना बड़ा बदलाव आया है, इसकी बानगी महिलाओं की बातों में साफ दिखी।
- 5 महीने की पद्मा को मिला तोहफा: नेतानार की निवासी सुखदेवी ने गृहमंत्री को बताया कि उन्होंने अपनी पांच महीने की बेटी पद्मा का नया कार्ड यहीं बनवाया है। पहले इस काम के लिए उन्हें 10 किलोमीटर पैदल चलकर नानगुर जाना पड़ता था, लेकिन अब यह सुविधा गांव में ही मिल रही है।
- महतारी वंदन योजना का लाभ: वहीं सोनामनी नामक महिला ने बताया कि दूरी अधिक होने के कारण वह काफी समय से महतारी वंदन योजना का ई-केवाईसी (e-KYC) नहीं करा पा रही थीं, लेकिन आज गांव के केंद्र में ही उनका काम आसानी से हो गया।
इस केंद्र के खुल जाने से अब ग्रामीणों को नया पंजीकरण, पता या मोबाइल नंबर अपडेट करने जैसी नागरिक सुविधाओं के साथ-साथ जन्म, मृत्यु, आय और जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए शहर की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।
’बैंक सखी’ और कौशल विकास से आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं
इस जन सुविधा केंद्र में केवल सरकारी कागजात ही नहीं बन रहे, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त भी किया जा रहा है। केंद्र में महिलाओं को ‘बैंक सखी’ का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके जरिए महिलाएं गांव में ही लोगों का पैसा जमा करने, निकालने, खाते खोलने और स्वयं सहायता समूहों के क्रेडिट लिंकेज जैसे बैंकिंग काम संभालेंगी।
इसके अलावा, गृहमंत्री ने सिलाई प्रशिक्षण केंद्र का भी दौरा किया, जहां बेसिक और एडवांस सिलाई सीख रही सुश्री विजय कुमारी ने बताया कि इस हुनर की बदौलत वे अपने परिवार का बेहतर लालन-पालन कर सकेंगी। वहीं, ‘धान डेकी प्रशिक्षण केंद्र’ में महिलाओं से चर्चा करते हुए गृहमंत्री ने कहा कि पारंपरिक तरीके से चावल निकालने से न सिर्फ आय बढ़ेगी, बल्कि उससे निकलने वाली भूसी मवेशियों के लिए पौष्टिक आहार का काम करेगी।
सुरक्षा कैंप से ‘सेवा केंद्र’ का सफर
इस मौके पर यह संदेश साफ गया कि बस्तर में सुरक्षा बलों के कैंप अब सिर्फ कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आदिवासियों के कल्याण और विकास के केंद्र बन रहे हैं। प्रशासन का लक्ष्य आने वाले समय में ऐसे कई और कैंपों को ‘सेवा केंद्रों’ में तब्दील करना है ताकि अंदरूनी इलाकों तक राशन, बिजली, पानी और डिजिटल सेवाएं बिना किसी बाधा के पहुंच सकें।
