बारिश का डर खत्म, बुढ़ापे को मिला ‘पक्का’ सुकून: कोरिया की सरस्वती के लिए वरदान बनी पीएम आवास योजना

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के ग्राम पंचायत बरदिया (वार्ड क्रमांक 12, रजवारीपारा) की रहने वाली श्रीमती सरस्वती की कहानी संघर्षों से भरी रही है। पति स्वर्गीय आनन्दराम के निधन के बाद आर्थिक तंगी और अकेलेपन ने उन्हें घेर लिया। कहने को तो उनके दो बेटे हैं, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों ने उन्हें इस उम्र में अकेले रहने पर मजबूर कर दिया।

​उनकी आजीविका का एकमात्र जरिया वृद्धावस्था पेंशन और राशन योजना थी। इस सीमित आय में दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना ही एक चुनौती थी, ऐसे में पुराने कच्चे मकान की मरम्मत का सपना देखना भी उनके लिए किसी विलासिता से कम नहीं था।

जब बारिश की बूंदें लाती थीं ‘खौफ’

​सरस्वती के लिए मानसून का मौसम कभी सुहावना नहीं रहा। वे याद करती हैं कि कैसे बारिश की हर बूंद उनके मन में खौफ पैदा कर देती थी। जर्जर कच्ची दीवारें कब ढह जाएं और टपकती छत से घर का सामान कब भीग जाए, इसी चिंता में उनकी रातें जागकर कटती थीं। उम्र के इस पड़ाव में जहाँ सुकून की जरूरत थी, वहां वे असुरक्षा के साये में जी रही थीं।

​”मेरा घर सिर्फ मिट्टी का ढेर नहीं था, वह मेरी बेबसी का गवाह था। हर साल डर लगता था कि कहीं यह छत ही मेरी चिता न बन जाए।” — सरस्वती

पीएम आवास योजना: उम्मीद की नई किरण

​इन्हीं मुश्किल हालातों के बीच प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) उनके जीवन में उजाला लेकर आई। योजना के तहत उन्हें पक्का आवास स्वीकृत हुआ। सरकारी सहायता और उनकी अपनी मेहनत से वह कच्चा घर अब एक मजबूत पक्के मकान में तब्दील हो चुका है।

​अब न तो आंधी का डर है और न ही भारी बारिश की चिंता। सरस्वती अब अपने नए घर में सम्मान और आत्मविश्वास के साथ रहती हैं।

“यह सिर्फ चार दीवारें नहीं, मेरा वजूद है”

​भावुक होते हुए सरस्वती कहती हैं कि इस घर ने उन्हें वह सुरक्षा दी है जो शायद उनके अपनों से भी उन्हें नहीं मिल सकी। वे प्रधानमंत्री और राज्य सरकार का आभार जताते हुए कहती हैं कि यह घर उनके बुढ़ापे की सबसे मजबूत लाठी बन गया है।

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