जशपुर का बगिया बनेगा स्मार्ट सिंचाई का राष्ट्रीय मॉडल, अंडरग्राउंड पाइप और IoT तकनीक से बुझेगी 13 गांवों के खेतों की प्यास

जशपुरनगर, 21 मई 2026

खेती-किसानी के मामले में जशपुर जिला जल्द ही पूरे देश के सामने एक नई नज़ीर पेश करने जा रहा है। जिले के कांसाबेल विकासखंड के ग्राम बगिया में ‘समृद्धि कमांड क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन आधुनिकीकरण’ (एम-कैड) योजना पर तेजी से काम चल रहा है। आज कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने मैनी नदी पर बन रही इस महत्वाकांक्षी बगिया बैराज आधारित सिंचाई परियोजना के निर्माण कार्यों का सीधा जायजा लिया। फिलहाल यहाँ ले-आउट और खुदाई का काम अपने शुरुआती चरण में है।

​निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि यह प्रोजेक्ट भविष्य में एक ‘आदर्श सिंचाई मॉडल’ बनने वाला है, इसलिए इसके निर्माण में गुणवत्ता से कोई समझौता न हो और काम तय समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाए।

​न नहरों का झंझट, न जमीन अधिग्रहण की टेंशन

​आमतौर पर सिंचाई परियोजनाओं में नहरें बनाने के लिए बड़े पैमाने पर किसानों की जमीन का अधिग्रहण करना पड़ता है, लेकिन यह योजना बिल्कुल अलग है। इसमें पारंपरिक नहरों की जगह ‘प्रेसराइज्ड पाइप इरिगेशन नेटवर्क’ बिछाया जाएगा। यानी खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए पाइप लाइनें जमीन के अंदर से गुजरेंगी। इससे किसानों की जमीन भी बचेगी और पानी के वाष्पीकरण (Evaporation) या बर्बादी की समस्या भी नहीं रहेगी।

​तकनीक का कमाल: डेटा बताएगा खेत को कितने पानी की जरूरत है

​इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसका हाई-टेक होना है। पानी की हर बूंद का सही इस्तेमाल हो, इसके लिए पूरे सिस्टम को सौर ऊर्जा (Solar Energy) से चलाया जाएगा। यही नहीं, जल प्रबंधन के लिए SCADA (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विज़िशन) और IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल होगा।

​सिस्टम का स्मार्ट डेटा खुद एनालिसिस करके यह तय करेगा कि किस इलाके में, कब और कितने पानी की जरूरत है। इससे किसान न केवल मौसम की मार और जलवायु परिवर्तन के खतरों से बच सकेंगे, बल्कि कम पानी में ज्यादा पैदावार भी ले सकेंगे।

​छत्तीसगढ़ का इकलौता प्रोजेक्ट, केंद्र से मिले 95.89 करोड़

​यह कोई आम सिंचाई योजना नहीं है। भारत सरकार ने देश के 23 राज्यों में ऐसे 34 स्मार्ट सिंचाई प्रोजेक्ट मंजूर किए हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ से एकमात्र ‘बगिया क्लस्टर’ को शामिल किया गया है। लगभग 119 करोड़ रुपये की इस पूरी योजना में भारत सरकार की ओर से 95.89 करोड़ रुपये की बड़ी स्वीकृति मिल चुकी है।

​इन 13 गांवों की बदलेगी तस्वीर

​एम-कैड योजना के पूरा होने से इलाके के लगभग 4,933 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में साल भर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इस योजना का सीधा फायदा इन 13 गांवों के हजारों किसानों को मिलेगा:

  • ​बगिया
  • ​उसकुटी
  • ​रजोती
  • ​सुजीबहार
  • ​चोंगरीबहार
  • ​बांसबहार
  • ​डोकड़ा
  • ​सिकरिया
  • ​पतराटोली
  • ​गहिराडोहर
  • ​बीहाबल
  • ​नरियरडांड
  • ​ढुढुडांड

​इस परियोजना में किसानों की भी सक्रिय भागीदारी होगी, जिससे उन्हें उन्नत कृषि पद्धतियों से जुड़कर अपनी आय दोगुनी करने का सीधा मौका मिलेगा।

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